Friday, April 17, 2020

फुटनोट 376 (जमाती और महामारी)

जमाती को तो मैंने कभी डिफेंड नहीं किया बल्कि लगातार उनके विरुद्ध लिखा हूं, तमाम मुसलमान भी उनके विरुद्ध लिख रहे हैं। लेकिन उनकी वजह से जो सांप्रदायिक जहर फैलायाजा रहा है वह भी उतना ही खतरनाक, बल्कि ज्यादा खतरनाक है। जिस तरह कनिका या मप्र की आईएएस के रिपोर्ट न करने के अपराध के लिए हर हिंदू नहीं जिम्मेदार है उसी तरह जमातियों के अपराध के लिए हर मुसलमान नहीं जिम्मेदार है। अस्पताल वालों ने नर्सों के सामने नंगे होनेकी खबर का खंडन किया। पुलिस वालों ने कितनी अफवाहों का खंडन किया। किसी के अपराध के लिए दूसरों को नहीं जिम्मेदार ठहराया जा सकता। मेरे लिए हिंदू फिरकापरस्त और मुसलमान फिरकापरस्त दोनों समाज के अपराधी हैं।

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