Thursday, November 22, 2018

गूंगे-बहरों की कायनात

यह गूंगे-बहरों की कायनात है
जो न सुन सकती तबाही के धमाके
न मचा सकती किसी भी बात पर शोर
आदतन सह लेती है सब जुल्म-जोर
(ईमि: 23.11.2018)

Sunday, November 18, 2018

मोदी विमर्श 104 (36गढ़ की आबादी)

मोदी जी ने छत्तीसगढ़ की कुल आबादी के 11 गुना लोगों का जनधन खाता खुलवा दिया। यह अतिरंजित कल्पना संघ की अंतर्निहित प्रवृत्ति है। इलाहाबाद के एक सीनियर हैं, राजनैतिक बेरोजगारी में शांत्वना पुरस्कार के रूप में उन्हें उप्र भाजपा के बौद्धिक प्रकोष्ठ की जिम्मेदारी दे दी गयी है, मोदी जी ने तो इस प्रकोष्ठ की जिम्मेदारी अडानी-अंबानी नी को दे रखा है। इवि के एक ग्रुप में सांप्रदायिकता की एक पोस्ट पर उन्होंने औरंगजेब द्वारा 40 मन जनेऊ जलाने के रहस्योद्घाटन के बाद उस समय सोवियत संघ की कुल आबादी के 23 गुना लोगों की हत्या करवा दिया। जब मैंने गूगल बाबा की मदद से उनके झूठ के बारे में बताया तो बोले चलो यह छोड़ो लेकिन रोजा लंक्ज़ंबर को तो घसीट-घसीट मारा था।

शिक्षा और ज्ञान 171 (लाइब्रेरी)

आज गांव-गांव लाइब्रेरी आंदोलन की जरूरत है दिनेश यादव उन्मुक्त और Laxman Yadav सराहनीय प्रयास कर रहे हैं। किताबों पर एकाधिकार के चलते विचारधारा के रूप में ब्राह्मणवाद का वर्चस्व कायम रहा। एकाधिकार खत्म होते ही, नई चुनौतियों से जूझने की बजाय हिंदुत्व की खोल ओढ़ लिया। खोल दरकने लगी तो राष्ट्रवाद बन गया। राममंदिर अब धार्मिक नहीं राष्ट्रवादी अभियान बन गया है। यानि, राष्ट्रवाद ब्राह्मणवाद का पर्याय बन गया है। इस धोख को उखाड़ने के लिए जाति का विनाश अनिवार्य है। 'हिंदू' जातियों का पिरामिडाकार समुच्चय है। जब जाति नहीं रहेगी, हिंदू शब्द निरर्थक हो जाएगा, विचारधारा के रूप में हिंदुत्व (ब्राह्मणवाद) स्वतः विलुप्त हो जाएगा। ये जेयनयू की लाइब्रेरी का बजट 80% फीसदी काट दे या उप्र की शिक्षा बजट 90%। लोग किताबों के महत्व से परिचित हो गए हैं, पढ़ ही लेंगे, अब तो बहुत सी ऑनलाइन उपलब्नध हैं। नहीं तो कबीर बन जाएंगे।