Saturday, April 11, 2020

ईश्वर विमर्श 93 (श्रृजन)

एक अंधभक्त धरती के भगवानों की बात करते करते किसी परमात्मा की बात करने लगा, फिर पूछा अगर कोई शक्ति नहीं तो हम कहां से आते हैं, कौन हमें संचालित करता है? वगैरह वगैरह, उस पर:

आप अपने मां-बाप के प्रेम की भौतिक अभिव्यक्ति की जीववैज्ञानिक परिघटना के फलस्वरूप पैदा हुए तथा परवरिश, परिवेश और समाजीकरण से आपका व्यवहार रूप ग्रहण करता है, विवेक और अंतरात्मा से नैतिकता-अनैतिकता का निर्माण होता है। भगवान की जरूरत समाज द्वारा मन में बैठाए गए भय और असुरक्षा का परिणाम है। जो आत्मबल अर्जित कर उस भय और असुरक्षा से मुक्त हो पाता है उसे भगवान की बैशाखी की जरूरत नहीं महसूस होती। यह मैं 65 साल की उम्र के अनुभव से कह रहा हूं। जिस दिन खुद पर भरोसा हो जाएगा किसी अंधविश्वास और अंध आस्था की जरूरत नहीं महसूस होगी। अगर सब कुछ संचालित करने वाली कोई शक्ति है तो वह समाज में बुराइयां खत्म क्यों नहीं करती? यो तो कर ही नहीं सकती तो सर्वशक्तिमान कैसी? या करना नहीं चाहती, तो दुष्टता है। या न कर सकती है न करना चाहती है तो दुष्टता और सर्वशक्तिमान होने का खंडन दोनों है। विज्ञान का कोई घमंड नहीं होता, विज्ञान ज्ञान की निरंतर प्रक्रिया है।

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