Saturday, September 26, 2026

जंतर मंतर 3

 ज्ञानेश तो प्यादा है, लगता है, कॉक्रोचों को प्रतिरोध की राजनीति पर राहुल गांधी के वर्चस्व को तोड़ने के लिए लाया गया है।


प्रधान के इस्तीफे की मांग प्रतीकात्मक थी, वास्तविक मांग तो शिक्षा और परीक्षा व्यवस्था में आमूल परिवर्तन की होनी चाहिए थी, प्रधान की जगह ज्यादा दकियानूस, स्त्रीविरोधी बलात्कार समर्थक प्रहलाद जोशी आ गया है। ज्ञानेश जाएगा कोई इससे भी बड़ा खिलाड़ी आजाएगा। "सिर्फ हगामा खड़ा करना मेरा मकसद नहीं, ......... हमारी कोशिश है कि ये सूरत बदलनी चाहिए। इंकिलाब जिंदाबाद।

Tuesday, September 22, 2026

जंगलराज

 


यूपी में अपराधियों की बोलती तूती है
सत्ता में बैठे सबसे बड़े अपराधी हैं
कानून व्यवस्था जिनके पैरों की जूती है
जैसा देखा सबने जंतरमंतर पर
कुछ अपराधी सादे कपड़ों में होते हैं
कुछ खाकी वर्दी में सितारे टांके रहते हैं
कुछ शूट-बूट में रहते हैं
और कुछ गेरुआधारी हैं
बिहार तो नाम का जंगलराज
यूपी में जंगलराज का नाम है रामराज
दिल्ली दोश का राजधानी है
जंगलराज की रानी है
23.09.2026

Saturday, September 19, 2026

knowledge

 Key to any knowledge is questionng; questioning

 anything and everything beginning with one's own 

minset.

Words

 Words acqiure meaning through 

tone/connotation/inntent and the context.

Friday, September 18, 2026

सब याद रखा जाएगा

 सब याद रखा जाएगा

 सब याद रखा जाएगा
जब जनअदालत इतिहास पर फैसला देने बैठेगी

बजरंगी नाज़ियों के गुनाहों पर बहस होगी
और इन बजरंगी नाजियों के हर गुनाह की सजा मुर्रर होगी।

Friday, September 11, 2026

बेतरतीब 192 (बचपन)

 हमारे बचपन में हमारे गांव में पहला शहरी खेल वॉलीबॉल ही पहुंचा था, गांव के खेल (कबड्डी, झाबर, शुटुर्र या शुर्र, लखनी, गुल्ली डंडा आदि) तो थे ही। उस समय (1960-67) ब्लॉक में गांव स्तर पर युवक मंगल दल की खेलकूद और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रतियोगिताएं होती थी। वॉलीबॉल में हमारे गांव की टीम ब्लॉक के अन्य गांवों में खेलने जाती थी और दूसरे गांवों की टीम हमारे गांव में आती थीं। ग्रामीण खेलों में टीमें बन जाने पर दोनों टीमों के कप्तानों (कुछ और कहा जाता था, भूल गया) के बीच गोंटी या पत्ता से लॉटरी से तय होता था कि मैं किस टीम में रहूं। एकाधबार ऐसा हुआ कि छुआ गया कि नहीं पर टीमों में झगड़ा हो जाता और खेल बंद होने की नौबत आ जाती। मुझे लगता कि खेल ही तो है चलता रहनी चाहिए और मेरा मामला होने पर, छूने या छुआ जाने के विरोधी टीम के दावे को मान लेता। इसलिए दोनों टीमों में मुझे बोझ ( Liability) समझा जाता था। 1967 में हाई स्कूल (कक्षा 9-10) की पढ़ाई करने जब शहर चला गया तब भा गांव आने पर अपने से जूनियर लड़कों के साथ खेलता, तब दोनों ही टीमें मुझे अपनी टीम में शामिल करने को तैयार रहतीं। अब तो गांव के काफी खेल खत्म से हो गए हैं, सभी आयु समूह के लड़के क्रिकेट ही खेलते हैं।

Thursday, September 10, 2026

जब भी हम सोचते हैं नए सिरे से शुरू करने को

 जब भी हम सोचते हैं शुरू करने को

 जब भी हम सोचते हैं शुरू करने को
नए सिरे से

तब तक जो भी हो चुका हो
नए सिरे से शुरू करना हमेशा नया होता है
पुरानी मंजिलें पुरातन हो चुकी होती हैं
और इंतजार कर रही होती हैं नई मंजिलें
किलकारी मारते बच्चे बड़े हो चुके होते हैं
नए नग्में लिख रहे होते हैं नई पीढ़ी के
और हम कहते हैं
हर अगली पीढ़ी हमेशा तेजतर होती है
और पीढ़ी-दर-पीढ़ी गवाह बनती है
इतिहास की अनवरत यात्रा की
पाषाणयुग से साइबर युग तक।
(ईमि: 09.09.2026)