Wednesday, May 17, 2017

सैनिक की शिकायत

जिस सैनिक ने की रोटी की शिकायत
और किया सेना में भ्रष्टाचार की मूर्ति का अनावरण
निकाल दिया गया उसे नौकरी से देशद्रोह के आरोप में
दिमाग का इस्तेमाल सेना की सेवा शर्तों के खिलाफ है
(ईमि: 16.05.2017)

Tuesday, May 16, 2017

साम्राज्य भूख का


बढ़ रहा साम्राज्य भूख का
पूरा देश है भक्ति से ओत-प्रोत
लगता है बुद्ध के देश में
सूख गया है तर्क-विवेक का श्रोत
(ईमिः 17.05.2017)

Sunday, May 14, 2017

शिक्षा और ज्ञान 111 (मनुस्मृति)

चुनाव आयोग, नीति आयोग, रिजर्व बैंक...... सारी संवैधानिक संस्थाएं 'प्रतिबद्ध' होती जा रही हैं या हो गयी हैं. भारतीय समाज विज्ञान परिषद के नव-नियुक्त मुखिया ने सामाजिक शोध-क्षेत्र से मैकालियन और मार्क्सियन विद्वानों द्वारा 'विकृत' धारा को नेस्त-नाबूद करने की कसम खाई है क्योंकि ये 'मुसलमान शासकों द्वारा' चालू की गयी मर्दवादी और जाति-पांत की बुराइयों को भारतीय बताती हैं. संस्कृति भारती आरयसयस की एक यनजीओ है जो '8000' साल पहले मनु महराज के पुण्य विचारों में 5500 साल पहले दलित विरोधी और नारी विरोधी विकृतियां जोड़कर मनुस्मृति को बदनाम किया जा रहा है और उन्होंने संस्कृतिमंत्रालय को इस पर नए सिरे से शोध की एक परियोजना भी सौंपी है जिसका मकसद मनुस्मृति से गंदी बातें मिटाकर उसे पवित्र करने का है. हम इतिहास के अंधे दौर से गुजर रहे हैं जहां झूठ की तूती बोलती है और विवेक का बलिदान होता है. आने वाली पीढ़ियां जब इस दौर का इतिहास पढ़ेंगी तो अपने पूर्वजों पर वैसे ही शर्म करेंगी जैसे हम मनुस्मृति की अमानवीय विरासत पर करते हैं.

Saturday, May 13, 2017

एक घर बनाने में

पूरी जिंदगी लग जाती है एक घर बनाने में
उंमादी भीड़ एक बार भी नहीं सोचती यह बात
जलाती है जब दर्जनों घर एक साथ
शामिल हो भीड़ में
क्यों बन जाता इंसान नरपिशाच
(ईमि:12.05.2017)

Wednesday, May 10, 2017

नवब्राह्मणवाद 26

किसी ब्राह्मण व्यक्ति की बात नहीं हो रही है, ब्राह्मणवाद की विचारधारा की बात हो रही है, जिसका मूलमंत्र है, कर्म और विचार की बजाय जन्म के आधार पर व्यक्तित्व का मूल्यांकन और विवेक पर आस्था को तरजीह देना. ऐसा करने वाला जन्मना अब्राह्मण भी इसी कोटि में आता है, इसीलिए उसे नवब्राह्मणवादी कहा जाता है.

नवब्राह्मणवाद 25

हमने तो 13 साल की उम्र में जनेऊ तोड़कर समाज को ऊंच-नीच में बांटने वाली ब्राह्मणवादी संस्कृति का निषेध शुरू कर दिया था, महिलाएं और दलित शिक्षा के वर्जित क्षेत्र का अतिक्रमण कर उसका निषेध कर रहे हैं। जब शिक्षा पर एकाधिकार के जरिए ज्ञान पर ब्राह्मणवाद का वर्चस्व टूटने लगा तो शातिराना ढंग से उसने हिंदुत्व की खोल ओढ़ ली और अब राष्ट्रवाद बन गया है।

नवब्राह्मणवाद 24

वैसे जनेऊ तोड़कर ब्राह्मणवाद के निषेध की मेरी बात में कुछ रूपक और कुछ अतिरंजना है. 1960 के दशक में कर्मकांडी परिवेश में पले गांव के, साल भर से छोटे कस्बे में रहे, एक 13 साल के ब्राह्मण बालक की सामाजिक चेतना विचारधारा समझने की नहीं रही होगी. मुझे लगता है कि प्रवृत्तिगत उपयोगितावाद की भावना प्रमुख कारण था. कई लोगों ने समझाने की कोशिस की थी लेकिन कोई भी संतोषजनक कारण नहीं बता पाया और मुझे 3 धागे अनावश्यक लगे. चुटिया भी उसी साल काट दिया. 17-18 साल की उम्र तक नास्तिकता की यात्रा के दौरान लगता था कि शिक्षा के प्रसार से जनेऊ तोड़कर बाभन से इंसान बनने वालों की तादात बढ़ती जाएगी लेकिन हुआ उल्टा, नये नये जनेऊ पहनने वाले नवब्रह्मणों की संख्या बढ़ती जा रही है.