ज्ञानेश तो प्यादा है, लगता है, कॉक्रोचों को प्रतिरोध की राजनीति पर राहुल गांधी के वर्चस्व को तोड़ने के लिए लाया गया है।
प्रधान के इस्तीफे की मांग प्रतीकात्मक थी, वास्तविक मांग तो शिक्षा और परीक्षा व्यवस्था में आमूल परिवर्तन की होनी चाहिए थी, प्रधान की जगह ज्यादा दकियानूस, स्त्रीविरोधी बलात्कार समर्थक प्रहलाद जोशी आ गया है। ज्ञानेश जाएगा कोई इससे भी बड़ा खिलाड़ी आजाएगा। "सिर्फ हगामा खड़ा करना मेरा मकसद नहीं, ......... हमारी कोशिश है कि ये सूरत बदलनी चाहिए। इंकिलाब जिंदाबाद।
