Wednesday, December 20, 2017

फुटनोट 151 (भूमिहार से इंसान)

अरविंद रायः पहले भी तुम्हें बताया है, तुम अगर मेरे इस युवा साथी, उमर के साथ 15-20 मिनट गुजार दो तो दिमागी विकास और सामाजिक चेतना के मामले में तुम गदहिया गोल से एक में चले जाओगे वरना दू दूना चार का भजन गाते जीवन काट लोगे। कन्हैया तो मोदी जैसा सीपीआई के लफ्फाज है फर्क इतना है मोदी अपढ़ है, कन्हैया पढ़ा-लिखा है इसलिए मोदी की उससे कुछ-कुछ कुछ हो जाती है। लेकिन अभी फासीवाद से लड़ाई में सबके साथ की जरूरत है। भक्त तो बंददिमाग होता है। तुमसे उम्मीद थी कि भूमिहार से इंसान बन जाओगे लेकिन तुमने अभी तक नाउम्मीद ही रखा है। फिर भी मैं तो सदाबहार आशावादी हूं। उमर भारत का उदीयमान, क्रांतिकारी इतिहासकार है। वैसे पिछले जमाने में मैंने तुमसे Umar पर तुम्हारे सवाल पर तुमसे पूछा था कि Anirban और उमर पर एक ही मामले हैं दोनों एक सा स्टैंड लेते हैं लेकिन तुम अनिर्बन के 'देशद्रोह' का नहीं मुझसे उमर के देशद्रोह का हिसाब मांगते हो? यह तुम्हारे दिमाग में अटाल्य रूप से भरे फिरकापरस्त कूड़े का परिचायक है। साफ-सफाई अच्छी बात है, वह दिमाग के कूड़े की सफाई पर भी लागू होती है।

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