Saturday, December 30, 2017

ब्राह्मणवाद 2

एक पांडे जी ने मेरी एक पोस्ट पर कमेंट किया " aap bar-bar apne ko kyon BABHAN se insan banne ki ghoshna karte hai.Mujhe to shakl-surat, kad- kathi aurbuddhi-vichar se kabhi aap babhan nahi lage aur na hai".

उसपर:

बाभन से इंसान बनना एक रूपक है, जन्म की जीवैज्ञानिक दुर्घना की अस्मिता से ऊपर उठकर एक स्व-अर्जित विवेकसम्मत अस्मिता बनाने का। बाभन से इंसान बनना वैसे ही है जैसे अहिर से इंसान बनना या हिंदू-मुसलमान से इंसान बनना। जन्म के आधार पर व्यक्तित्व का मूल्यांकन ब्राह्मणवाद का मूलमंत्र है जिसने समाज को शताब्दियों तक जड़ बनाए रखा। शक्ल और कद-काठी से मूल्यांकन ब्रह्मणवाद में आपका नया योगदान है। संयोग से मैं एक कर्मकांडी ब्राह्मण परिवार में पैदा हो गया जिसमें मेरा कोई योगदान नहीं है, उस पर शर्म-या गर्व करने का मुझे कोई औचित्य नहीं दिखता। इंसानियत ही मेरी जाति-धर्म है, जिस पर मुझे गर्व है।

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