Friday, March 9, 2018

लल्ला पुराण 205 (प्रोफेसर और टूबेल ऑपरेटर)

इवि के एक ग्रुप में मेरी पोस्ट्स पर कुछ मिश्र-पांडे-शुक्ल-त्रिपाठी-मालवीय नामधारी लोग पोस्ट की विषयवस्तु का खंडन करने की बजाय मेरे व्यक्तित्व का विश्लेषण करने लगते हैं, उनके जवाब में उस ग्रुप में यह पोस्ट डाला:

मित्रों इस ग्रुप में 4- 5 (या ऐसे ही कुछ) लोग मेरी पोस्ट देखते ही उसमें लिखी बातों के खंडन-मंडन की बजाय निराधार निजी आक्षेप करने लगते हैं, लेकिन मैं मान लेता हूं कि वे इवि के स्तर के प्रतिनिधित्व नहीं करते, मैं पूछता हूं भाषा की तमीज घर कहां सीखा क्योंकि हर व्यक्ति अपने परिवेश से प्रभावित होता है। मुझे इनकी ये हरकतें समय नष्ट करने और उत्तेजित करने तथा गाली गलौच करने वाले आईटी सेल्स की ट्रोलगीरी लगती है कभी तैस में मैं भी उन्ही की भाषा में जवाब दे देता हूं और अपनी शांति तथा समय नष्ट करती है। सीनियर जूनियर की इवि की परंपरा की बातें ढकोसला लगती हैं। एक ने कहा मैं झूठ-मूठ में प्रोफेसर लिखता हूं, वास्तव में 'टूबेल आपरेटर हूं' और एक ने विश्वविद्लाय के फैकल्टी की लिस्ट खगाल डाला और उसमें मेरा नहीं पाया। अरे भाई टूबेल ऑपरेटर को भी अपनी बात कहने का हक है और पढ़े-लिखों को चाहिए, 'टूबेल ऑपरेटर' को लिखने के लिए और प्रोत्साहित करें और उसकी बातों की समीक्षा करें न कि ब्राह्मणीय श्रेष्ठताबोध में उसे गाली दें और ज्ञान प्राप्त करने की उसकी अनधिकृत चेष्ठा के लिए मनुवादी आचार संहिता के तहत दंडित और अपमानित करें। किसी ने इनबॉक्स में कहा कि मेरे चलते ग्रुप का 'अमन' भंग होता है। अब ग्रुप का 'अमन' भंग न हो और ट्रोलगीरी पर मेरा खून न जले और मन की शांति भंग न हो, इस लिए हिंदी-अंग्रेजी में छपे लेखों की लिंक शेयर करने के अलावा कोई पोस्ट नहीं डालूंगा। जिसे मेरी 'बकवास' न सुननी हो न पढ़े और पढ़े भी तो मन-ही-मन गाली देकर संतोष कर ले और 'टूबेल' ऑपरेटर के दिमागी स्तर की मजबूरी समझते हुए स्तर बढ़ाने की सलाह दे, लिख कर गाली न दे। छात्र-राजनीति पर 7 साल पुराना ("कंटेम्परेरी साउथ एसिया", राउतलेज प्रकाशन, लंदन में छपा) लेख शेयर किया एक युवा साथी ने कमेंट किया कि यहां इतनी अंग्रेजी किसे आती है? मुझे उनकी बात पर आश्चर्य हुआ क्योंकि मैंने तो इवि में ही अंग्रेजी बोलने-लिखने का आत्मविश्वास अर्जित किया था, विवि पढ़ने जाने वाला अपने गांव का पहला लड़का होने के बावजूदा। मेरे पिताजी ने कुछ संस्कृत पढ़ने के अलावा प्राइमरी की ही पढ़ाई की थी। उस समय इवि में पीसीयस तीसरी-चौथी प्राथमिकता होती थी (आईएयस, आईपीयस औऱ आईयस एलाइड के बाद)। मैं तो सोचा था कि इवि के मंच से 'टूबेल ऑपरेटर' होने के बावजूद कुछ ज्ञान हासिल करूंगा लेकिन कुछ ब्राह्मणीय श्रेष्ठतावादियों को अब्राह्मणों की ज्ञानार्जन की जुर्रत बर्दास्त नहीं हो रही है जो उन्हें अपमान और अवमानना से भगाने की कोशिस करते हैं और अब्राह्मण बेचारा परेशान होकर अपना समय जाया करता है और मन की शांति। मन की अशांति दिमाग को भी अशांत कर देता है। अब टैग किए कमेंट का ही जवाब दूंगा। कहा-सुनी मॉफ।
विनीत:
ईश, टूबेल ऑपरेटर।

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