Sunday, March 4, 2018

लल्ला पुराण 201 (निरपेक्षता)

निरपेक्ष कुछ नहीं होता, मैंने तो निरपेक्षता का कभी दावा नहीं किया, न ही अपने ज्ञान के बारे में आपके फैसले का खंडन । मैं तो अपनी पक्षधरता का दावा डंके की चोट पर करता हूं। निरपेक्षता फरेब है, जो लोग अपनी पक्षधरता की विसंगतियों के तर्क नहीं पाते वो निरपेक्षता का ढोंग करते हैं। मैं अंधविश्वास और अंध आस्था के विरुद्ध तर्क और विवेक के पक्ष में हूं; पूंजीवादी शोषण के खिलाफ सर्वहारा की मुक्ति का पक्षधर हूं; अफवाहजन्य, धर्मोंमादी इतिहासबोध के विरुद्ध तथ्यपरक वैज्ञानिक इतिहासबोध के पक्ष में हूं; मर्दवाद के विरुद्ध स्त्री मुक्ति कानपक्षधर हूं; ब्राह्मणवाद के विरुद्ध जातिवाद से मुक्ति के पक्ष में हूं; खंडित संस्कृति के विरुद्ध सामासिक संस्कृति का पक्षधर हूं; फिरकापरस्त हैवानियत के विरुद्ध अमन-चयन की इंसानियत का पक्षधर हूं; युद्धोंमादी राष्ट्रवाद के विरुद्ध सर्वहारा अंतरराष्ट्रीयता के पक्ष में हूं; अमानवीय मनुवाद के विरुद्ध मानव मुक्ति के मार्क्सवाद के पक्ष में खड़ा हूं;... अंत में कठमुल्लापन के विरुद्ध बाभन से इंसान बनने का पक्षधर हूं। मैं लेनिनवादी अर्थों मे कम्युनिस्ट नहीं हूं, इसके अनुसार कम्युनिस्ट पार्टी का सदस्य ही कम्युनिस्ट होता है। सीपीयम एक संशोधनवादी संसदीय पार्टी है। मार्क्सवादी अर्थों में कम्युनिस्ट हूं। मार्क्स 1852 से किसी पार्टी में नहीं थे 1864 में पहले इंटरनेसनल के मुखिया थे जो कि पार्टी नहीं था। मैं 1987 से किसी पार्टी में नहीं हूं, मतभेद कुछ मूलभूत सैद्धांतिक हैं। बिना संगठन के परिवर्तन नहीं होता, दमन कई मोर्चों पर है, प्रतिरोध भी हर मोर्चे पर होना चाहिए। जनहस्तक्षेप नामक मानवाधिकार का संयोजक हूं। अभी 'संशोधनवाद' के अंतिम द्वीप का पतन', लिख रहा हूं, बीच में फेसबुक का नशा लग जाता है। यह भविष्य की क्रांतिकारी परिस्थितियों के लिए शुभ लक्षण हैं । अब सीपीयम के बहाने हमें मत गाली दीजिए, हम भी उन्हें गाली देते हैं लेकिन विपरीत कारणों से। आप कम्युनिस्ट होने के लिए हम कम्युनिस्ट न होने के लिए। शुभरात्रि।

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