Sunday, May 4, 2014

यह कन्या इंक़िलाब करेगी

आयेगा ही एक नये सहर का वह मंजर
मुक्त होगी मानवता होगा वह अद्भुत प्रहर
मुक्त होंगे मनुवादी जड़ता से नारी-ओ-नर
रचेगी ही यह कन्या एक इतिहास इतर
जब तोड़ेगी यह सारी मर्दवादी वर्जनाएं
और रचेगी एक नए वेद की नई ऋचाएं
खुद होगी रचइता और पात्र नये वृत्तांत का
करेगी उद्घाटन इस अंधेरे युग के अंत का
पूर्वकथ्य है इसका नारी प्रज्ञा-ओ-दावेदारी
बौखला रहे हैं जिससे मर्दवाद के पंसारी
आयेगा ही वह सुंदर-स्वतंत्र नया विहान
मिटायेगी मनुवाद का नाम-ओ-निशान
साथ होगे रहनुमा-ए मजदूर किसान
भोग्या-पूज्या नहीं होगी एक मुकम्मल इंसान
यह कन्या कॉफी नहीं बनाएगी
इंकिलाॉब करेगी
सलाम
(ईमिः04.05.2014)


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