Monday, April 7, 2014

चकित हिरणी सी आंखें


क्या कहती हैं चकित हिरणी सी ये आंखें
और चेहरे के जिज्ञासु भाव?
दिखता है इनमें जज़्बा कुछ कर गुजरने का
सड़ी-गली रीतियों को खंड-खंड करने का
हैं इनमें इरादे देने को नया आयाम इंसानी मर्यादा को
और ख़्वाब रचने का एक नई दुनिया
होगी जो मुक्त किसी भी अत्याचार से
भेदभाव के हर दुराचार से
न होगी गुंजाइश रंजिश-ओ-नफरत की
शोषण व वर्चस्व की फरेबी फितरत की
होंगे लब आज़ाद सभी के और सक्रिय सर्जना
सभी होंगे स्तंत्र न होगी कहीं कोई वर्जना
आयेगा इंसानी गतिविज्ञान में अब और नहीं ठहराव
पनपेंगे-बढ़ेंगे-फूलेंगे-फलेंगे इंसानी समानुभूति के भाव
आंखों में है अब भी उस सपने का शुरूर
लगता है यह लड़की खास कुछ कर गुजरेगी जरूर
(ईमिः07.04.2014)
(हा हा ये तो कुछ कविता सी हो गयी, मैं तो सभी को लाल झंडा पकड़ा देता हूं बाकी...... खूब पढ़ो-लड़ो-बढ़ो)

2 comments:

  1. लगे रहिये । झंडा पकड़ाईये कविता सुनाईये । :)
    वो उधर अपना काम करें । हम इधर गोड़ गाड़ करें ।

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  2. सही,एक बार मैं हास्टल वार्डन था कई नई चीजें शुरू करने का प्रस्ताव हास्टल कमेटी में रखा. एक सदस्य ने कहा सर आप रगड़ रगड़ कर गधे को घोड़ा नहीं बना सकते. मैंने कहा मेरा काम है रगड़ना क्या पता कोइ बन ही जाए! ज्यादातर बन गए. हा हा. वे थे ही नहीं गधे. बस उन्हें बताना होता है कि तुम गधे नहीं हो प्रतिभावान इंसान हो लोग समझते हैं और उनकी समझ से अपनी समझ मुक्त रखो. हमारे स्टूडेंट्स न गधे होते हैं न अपराधी समझदार जिज्ञासु होते हैं कम से कम उतने जितने हम अपने को समझते थे.

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