Sunday, April 27, 2014

मोदी विमर्श 26

मेरी एक कविता पर पुष्पा जी  के कमेन्ट पर कमेन्ट--

पुष्पा जी मुझे पूरी दुनिया बहुत अच्छी लगती है कार्पोरेटी दलालों, संघी-जमाती-तालिबानी नर पिशाचों, मोदियाए जाहिलों और जनता के अन्य दूषणों के अलावा इंसानियत के सारी कायनात अच्छी लगती है. देश देश की जनता चलायेगी न कि गुजरात को अम्बानी-अडानी-टाटा को सुपुर्द करने वाला और किसानों आदिवासियों की जमीने छीन कर अपने कार्पोरेटी आकाओं को देकर उन्हें आत्म हत्या को मजबूर करने वाला इतिहासबोध से शून्य फासीवादी नर्पिशाच जिसने टुच्चे स्वार्थ के लिए क़त्ल-ए-आम और सामूहिक बलात्कार आयोजित किये. इस नरपिशाच की खासम-ख़ास माया कोदनानी को कल ही २८ साल की सVinod Shankar Singh  सादर प्रणाम सर, झूठ क्या है. मोदी के राज में जनसंहार और बलात्कार किसने किया? भगवान ने? हजारों सशस्त्र बजरंगियों की ट्रेन में आग किसने लगाई? अगर मोदी ने नहीं करवाया जो कि आप भी जानते हैं कि इस नरपिशाच की असलियत क्या है? तो इस नरसंहार के बाद शौर्य दिवस किसने मनवाया? हजारों लंपटों द्वारा सामूहिक बलात्कार, हत्या लूट शौर्य का काम है? अगर नहीं कराया तो रोक सका क्या? जब एक सूबे में इतने अमानवीय ?अपराध नहीं रोक सको तो देश में क्या करेगा? सर आप इस नरपिशाच की एक बात बता दीजिए जिससे आपको लगता है कि यह ज़ाहिल जिसे यह नहीं मालुम कि तक्षिला कहां है, विश्वद्रष्टा है जो 10, 000 रूपए निजी प्रचार में खर्च कर रहा है वब अपने आकाओं का ऋण लौटाने के लिए देश कितना बेचेगा? आप इसका एक वाक्य या कार्य उधृत कर दें जिससे आपका पूज्य हो गया तो मैं आपका अनुयायी बन जाऊंगा.Mayank Awasthi   मुजफ्फरनगर और शामली में संघियों ने मां के सामने बेटियों और बच्चों के सामने मां का बलात्कार मेरी बातेमं पढ़कर किया क्या? संघी तो पढ़ते ही नहीं. दिमाग और अंतरात्मा  में सामंजस्य बैठाकर सोचिए, मनुष्य का यही गुण उसे फशुकुल से फर्क करता है, इस फर्क को खत्म न करें. मोदियाये लोग सिर्फ अफवाहें फैलाते हैं और कुतर्क करते हैं. मोदी के गुरात का विकास अंबानी-अडाना-टाटा का विकास और लोगों का विनाश है. दुआ करता हूं कि आपलोगों को मोदियापे का भयंकर रोग से छुटकारा मिले. मोदियाये लंपट काशी में मोदी जी के राजनैतिक निर्वाण के आभास से बौखलाकर हुड़दंग कर रहे हैं कल की पुलिसिया पिटाई से इन संघी गुंडों का कोहराम शायद कम हो.जा हुई है और कातिलों बलात्कारियों का सरगना देश भर में वही करना चाहता है. ज़रा सोचिये अगर आप उस औरत की जगह होतीं तो कैसा लगता जिसे एजी के हवाले करने के पहले मोदी के शूर-वीरों ने गर्भ फाडकर आग के हवाले कर दिया? ज़रा सोचिए अगर आप उन सैकड़ों औरतों में एक होती जिन्हें मोदी के वीरों ने मामूहिक बलात्कार के बाद मार डाला? सोचिये अगर आप बिलकिस बानो होती तो कैसा लगता जिसके बच्चे को उसके सामने मार डाला गया. और जो दर्जनों बजरंगियों की टांगों के नीचे से गुजरने के बाद मरे होने का नाटक करने के बाद बच गयी जिसे मैं २०००२ में गोधरा के एक शिविर में मिला था. क्लीन चित की सफाई धूर्तता है. कोए महिला अगर बीबी छोडकर सेतियाबाजी करने वाले मर्दवादी तानाशाह का समर्थन करे तो उसके विवेक पर संदेह होता हा. क्षमा कीजियेगा..

Vinod Shankar Singh  सादर प्रणाम सर, झूठ क्या है. मोदी के राज में जनसंहार और बलात्कार किसने किया? भगवान ने? हजारों सशस्त्र बजरंगियों की ट्रेन में आग किसने लगाई? अगर मोदी ने नहीं करवाया जो कि आप भी जानते हैं कि इस नरपिशाच की असलियत क्या है? तो इस नरसंहार के बाद शौर्य दिवस किसने मनवाया? हजारों लंपटों द्वारा सामूहिक बलात्कार, हत्या लूट शौर्य का काम है? अगर नहीं कराया तो रोक सका क्या? जब एक सूबे में इतने अमानवीय ?अपराध नहीं रोक सको तो देश में क्या करेगा? सर आप इस नरपिशाच की एक बात बता दीजिए जिससे आपको लगता है कि यह ज़ाहिल जिसे यह नहीं मालुम कि तक्षिला कहां है, विश्वद्रष्टा है जो 10, 000 रूपए निजी प्रचार में खर्च कर रहा है वब अपने आकाओं का ऋण लौटाने के लिए देश कितना बेचेगा? आप इसका एक वाक्य या कार्य उधृत कर दें जिससे आपका पूज्य हो गया तो मैं आपका अनुयायी बन जाऊंगा.Mayank Awasthi   मुजफ्फरनगर और शामली में संघियों ने मां के सामने बेटियों और बच्चों के सामने मां का बलात्कार मेरी बातेमं पढ़कर किया क्या? संघी तो पढ़ते ही नहीं. दिमाग और अंतरात्मा  में सामंजस्य बैठाकर सोचिए, मनुष्य का यही गुण उसे फशुकुल से फर्क करता है, इस फर्क को खत्म न करें. मोदियाये लोग सिर्फ अफवाहें फैलाते हैं और कुतर्क करते हैं. मोदी के गुरात का विकास अंबानी-अडाना-टाटा का विकास और लोगों का विनाश है. दुआ करता हूं कि आपलोगों को मोदियापे का भयंकर रोग से छुटकारा मिले. मोदियाये लंपट काशी में मोदी जी के राजनैतिक निर्वाण के आभास से बौखलाकर हुड़दंग कर रहे हैं कल की पुलिसिया पिटाई से इन संघी गुंडों का कोहराम शायद कम हो.

Pushpa Tiwari पुष्पा जी मैंने तो मुहम्मद गजनी को भी सोमनाथ का मंदिर तोड़कर टनों  सोना-चांदी भी लूटते नहीं देखा. लेकिन इतने सोना चादी की जरूरत भगवान को कत्यों होती थी या है? और भगवान के शूर-वीर भक्त क्या कर रहे थे जब वह कुछ हजार घुड़सवारों के साथ शूरवीरों की धरती चीरते हुए सोमनाथ के खजाने तक पहुंचा? हां मैं मार्च 2002 में 15 दिन गुजरात के विभिन्न प्रभावित क्षेत्रों में एक फैक्टफाइंडिंग टीम के सदस्य के रूप में, बिलकिस बानो समेत तमाम पीड़ितो, प्रताड़कों और राहत कर्मियों से मिला था और कुछ अनाथ हो चुके बच्चों के साथ दिल्ली में हम लोगों ने एक प्रेस कांफ्रेंस भी किया था. अहमदाबाद से दिल्ली की यात्रा में कुछ नरपिशाचों से मिला था जो नरसंहार और बलात्कार का महिमा मंडन कर रहे थे. कुछ बातें सोचकर तो आज भी दिल दहल जाता है. एकत शाफ्टवेयर युवा इंजीनियर, जिसने गर्व से बताया कि एहसान जाफरी पर हमला करने वाली भीड़ में वह भी था. जब मैंने पूछा 13-14 साल की बच्चियों के बलात्कार में कौन सी बहादुरी है तो उसने जो कहा "सर उन्हे ऊपर भेजना ही था तो संतुष्ट करके भेजें". पुष्पा जी आपने मोदी का विकास देखा है? मैंने देखा है गुजरात के कुपोषित बच्चों को और मिला हूं आत्महत्या करने वाले किसानों के परिजनों से जिनकी हजारों एकड़ जमीनें मोदी ने अपने बाप की जागीर समझकर अपने थैलीशाह बापों -- अडानी-अंबानी टाटा को मिट्टी के भाव बेच दिया. मैंने सीएजी की रिपोर्ट पढ़ा है जिसमें बताया गया है कि मोदी ने 17600 करोड़ टाटा को 0.1फीसदी व्याजदर पर टाटा को दे दिया जो कि गुजरात के सालाना बजट का 25 फीसदी है. मैंने मोदी के ऊल-जलूल वक्तव्य पढ़े हैं जिस व्यक्ति को भारत का इतिहास का कुज्ञान हो वह देश कहां ले जाएगा?

पुष्पा जी मैंने मुजफ्फर नगर और शामली में संमघी वीरों द्वारा बाप को बांकी से काटकर मां के सामने बेटियों और बच्चों के सामने माँ का बलात्कार करते अपनी आंखों से नहीं देखा. देखता तो जान  दे देता इसे रोकने में. बलत्कृत औरतों से जरूर मिला हूं और संघी आतताइयों से मिला हूं जो बहू-बेटियों की इज्जत के नाम पर दूसरी बहू बेटियों की इज्जत लूटने को जायज ठहराया, हमारे पास उनरके रिकॉर्डेड बयान हैं जिसका ज़िक्र हमने अपनू रिपोर्ट में किया है. इस गांव के मुसलमानों का कुसूर यह था कि कुछ जाट लड़कियां अपने मुसलमान प्रेमियों के साथ भाग गयीं थी. मुरली मनोहर जोशी की वेटी शाहनवाज खान नाम के मुसलमान से शादी करो तो वह राष्ट्र धर्म है और साधारण जाट लड़की अपने मुस्लिम प्रेमी के साथ चली जाय तो लव जेहाद हो जाता है.

Mayank Awasthi  ईश्वर की धारणा पर अलग बहस हो सकती है मौं किसी खुदा-ना-खुदा को नहीं मानता. वैचारिक विकृति मूढ़ता की तार्किक परिणति है. मैं आरयसयस में रह चुका हूं और 186-87 में सांप्रदायिकता और औरत के सवाल पर एक शोध किया था. जिसमें सारा उपलब्ध संघी और जमाती साहित्य पढ़ डाला. वह लेख कंप्यटर-युग के पहले का है कभी स्कैन करके डालूंगा. मयंक जी मैं पूर्ईवाग्रहों के आधार पर नहीं, तथ्यों और सत्यापित विचारों के आधार पर ही लिखता हूं. ये बातें आप गुजरात सरकार की आॉफिसियल वेबसाइट पर और सीएजी रिपोर्ट से सत्यापित कर सकते हैं. गूगलल पर गुरात की सीएजी रिपोर्ट में खोज सकते हैं. संघियों की तरह अफवाहग जनित ज्ञान में नहीं यकीन करता.

मित्र मैं किसी से घृणा नहीं करता. गांधी की एक बात मुझे बहुत अच्छी लगती है, पाप से घृणा करो, पापी से नहीं. मैं आप सबसे बेइम्तहां मुहब्बत करता हूं इसीलिए अप्रिय सत्य बोलता रहता हूं सस्ती लोकप्रियता की परवाह किए बिना. मेरी इस आदत के शिकार विद्यार्थी मेरा एहसान मानते हैं. मैं कभी किसी परक व्यक्तिगत आक्षेप नहीं करता.

वही तो मैं भी कह रहा हूं. शामली के विस्थापित और बलत्कृत महिलाओं से मिलकर मुझे भारतवासी होने में शर्म महसूस हो रहा था. आज भी आप बुढ़ाना के शिविरों में इन पीड़ितों से मिल सकते हैं. मेरे पास मुहम्मदपुर में 9 अक्टूवर में खाप पंचायत के भाषणों की रिकॉर्डिंग है जिसमें खाप के नेताओं ने डाटों द्वारा लब जेहाद का बदला लेने के लिए बलात्कारियों के पुरुषार्थ का महिमामंडन है और इनका नेता बाबा हरकिशन अमित शाह का खास आदमी है. दंगे भड़काने में अहम भूमिका निभाने वाले भाजपा विधायक का आगरा में मोदी द्वारा सम्मानित करने का वीडियो चतो आपने देखा ही होगा. मुरली मनोहर की बेटी मुसलमान से प्यार करके शादी करले तो देशभक्ति है साधारण लड़की को मुसलमान तड़के से प्यार हो तो लबजिहाद.

Renu Ramesh  दूसरों तक विचार ही पहुंचाता हूं कुछ लोग इतने आतंकित हो जाते हैं कि ग्रुप से निकाल देते हैं बिना किसी जनमतसंग्रह के. इलाहाबाद के 3 ग्रुप्स से निकाला जा चपका हूं जिसे मैं तमगा मानता हूं.  Alumni of AU में मोदी पर मेरी एक कविता पर 85 लाइक थे 3-4 संघी बवाल करने लगे और वही लगता है ऐडमिन हैं सो जनता बनकर बिना बताए मुझे निकाल दिया क्योंकि कई युवक-युवतियां मेरी बातों से प्रभावित होने लगे थे. सत्ता का भय होता है ईमानदारी का आतंक. मेरे पिता दी उनके विचारों को न मानने के लिए धमकी देते रहते थे सो 18 साल की उम्र में घर से निकल गया यानि पैसा लेना बंद कर दिया और वह भेष बदलकर प्रतिकूलता में बरदान साबित हुआ. आत्मनिर्भरता के संघर्ष की शक्ति भविष्य की थाती बन गयी. 21 साल की उम्र में खाली हाथ दिल्ली भूमिगत रहने आया और बड़े रोब से कहता हूं बिना किसी का चवन्नी की चाय(1976 में चाय चवन्नी में मिलती थी) का एहसान लिए, देहाती अकड़ के साथ रहते हुए अपनी पढ़ाई-लिखाई किया और भाई बहनों की पढ़ाई-लिखाई का आर्थिक भार उठाया. भार इसलिए कह रहा हूं कि उन्होने भी पढ़ाई को पैसा कमाने की काबिलियत अर्जित करना ही समझा क्योकि मेरा काम विचार थोपना नहीं विचारों से परिचित कराना है. कुछ लोग इतने कमजोर और कायर होते हैं कि विचारों के परिचय से ही घबरा जाते हैं और रोकने का कोशिस करते हैं, मैं उन्हें कहता हूंः क्या सोचकर तुम मेरा कलम तोड़ रहे हो, इस तरह तो कुछ और निखर जोयेगी औवाज़

Pushpa Tiwari  मैं तो सभी को एक तराजू पर नहीं तौलता. खुटबा में मुसलमानों पर हमले का नेतृत्व करने वाले मुजफ्फर नगर के भाजपा प्रत्याशी संजीव बालियान को मोदी जितना बड़ा नरपिशाच नहीं मानता न सीटियाबाजी में मोदी के दल्ले के रूप में  पुलिस को लड़की की जासूसी के लिए पुलिस को  निर्देश देने वाले जमानत पर छूटे अपराधी अमित शाह जितना. अगर मोदी जीत गया तो इतिहास काफी पीछे खिसक जायेगा. .

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