Wednesday, April 2, 2014

लल्ला पुराण 142 (मोदी विमर्श 18)

These are few of my comments on the coments on my post, NaMo =BJP on a Allahabad Univ forum.


RSS=Rumor Spreading Service. I live with so many Muslims and there are Obscurantist and Communal scoundrels among the Muslims as they are in Hindus. RSS teaches rumor based sense of history that I can say with my own experiences. Stop it. Those educated people who cant transcend their identity emanating from the biological accident of birth in which they have no hand, are educated duffers.  Sanghis having no training of argument, they are trained to only obey and act , unable to debate the issue concerned, get the fits of being haunted by the specter of communism and exhibit their abusive sense of language during RSS training.  .

I have been writing about them consistently. All kinds of obscurantism and communalism are twins and are not any antique ideologies but modern ideologies born from the womb of capitalism. I wrote a paper "Women's Question in Communal Ideologies: A  Study into the ideologies of RSS and Jamat-e-Islami. and concluded that bot have not similar but congruent views on all the substantial socio-economic-political issues with common common anti-democratic authoritarian attributes. Everything should be in context, the current danger is RSS Fascism ideological  bankruptcy and lack of any constructive program of socio-economic agenda as Mandir issue has become a dead issue forces it to have its last weapon as agenda-- an individual who has expertise in spreading hatred and conducting pogrom.

इसमें बताइये मुद्दे पर कौन बात कर वरहा है? विषयांतर और गाली गलौच संघी विमर्श का तरीका है. मैंने एक पोस्ट डाला जिसका आशय यह है कि वैचारिक दिवालिया दलों के पास मुद्दे नहीं होते वे किसे आततायी व्यक्ति को मुद्दा बना लेते हैं, और बात पर बात करने की बजाय वे पढ़े-लिखे जाहिल जो जन्म की जीववैज्ञानिक दुर्घटना की अस्मिता से ऊपर नहीं उठ पाते अभुआने लगते हैं.

पानी पी पी कर भाजपा को गरियाने वाले उदितराज और पासवान जैसे लोग सत्ता के शार्टकट के चक्कर में मोदिया गये. भाजपा को कोसने वाले तमाम दलों के तमाम लोग रातोंरात मोदिया गये और भाजपा पुराने कार्यकर्ताओं की अनदेखी कर उन्हें सर पर बैठा रही है.  देश के इतिहास का ऐसा कुज्ञान हो कि "गुप्त साम्राज्य" के चंद्रगुप्त मौर्य का  "गंगा के तट पर" सिकंदर का युद्ध करा दे, भगत सिंह को अंडमान भेज दे, श्यामा प्रसाद मुखर्जी का विवेकानंद से वार्तालाप करा दे...... इतिहासबोध से वंचित ऐसे व्यक्ति के लिए किस शब्द का प्रयोग किया जाय? हजारों मासूमों की हत्या-बलात्कार के जरिए सांप्रदायिक उनमाद फैलाकर राष्ट्र की सामासिक संस्कृति को नष्ट कर मानवता को कलंकित करने वाले को किस विशेषण से नवाजा जाय?

Tribhuwan Singh किशारावस्था में मैं भी जब तक संघी था ऐसे ही कुतर्क करता था. मोदियापा अब एक स्वीकृत शब्द है उस रोग के लिए जिसके प्रभाव में लोग दिमाग का इस्तेमाल मुल्तवी  कर पर पर हर हर मोदी का भजन करने लगते हैं मोदी के देवत्व के अज्ञात कारणों से, शिक्षा का काम कारण खोजने में दिमाग का इस्तेमाल है. अब मोदियाये लोग मोदियापा को गाली समझें तो अच्छी बात है जैसे मैं अपने लिए पंडितजी संबोधन गाली मानता हूं और हजारों साल की समाज की जड़ता की भूमिका लिखने वाले अपने पूर्वजों के पाप का दंड मानकर बर्दाश्त कर लेता हूं.

पानी पी पी कर भाजपा को गरियाने वाले उदितराज और पासवान जैसे लोग सत्ता के शार्टकट के चक्कर में मोदिया गये. भाजपा को कोसने वाले तमाम दलों के तमाम लोग रातोंरात मोदिया गये और भाजपा पुराने कार्यकर्ताओं की अनदेखी कर उन्हें सर पर बैठा रही है.  देश के इतिहास का ऐसा कुज्ञान हो कि "गुप्त साम्राज्य" के चंद्रगुप्त मौर्य का  "गंगा के तट पर" सिकंदर का युद्ध करा दे, भगत सिंह को अंडमान भेज दे, श्यामा प्रसाद मुखर्जी का विवेकानंद से वार्तालाप करा दे...... इतिहासबोध से वंचित ऐसे व्यक्ति के लिए किस शब्द का प्रयोग किया जाय? हजारों मासूमों की हत्या-बलात्कार के जरिए सांप्रदायिक उनमाद फैलाकर राष्ट्र की सामासिक संस्कृति को नष्ट कर मानवता को कलंकित करने वाले को किस विशेषण से नवाजा जाय?

विमर्श में विषयांतर की संघी प्रवृत्ति का आभास अनुभव आधारित है. मैं किसी भी विषय पक बात करता हूं तो वे कम्युनिस्टों को गालियां देने लगते हैं और आपकी ही भांति निजी आक्षेप करने लगते हैं यह जाने बिना कि मैं किसी कम्युनिस्ट पार्टी का सदस्य नहीं हूं और अंधअनुशरण की संघी प्रवृत्ति के कम्युनिस्ट भी ऐसी ही गालियां देते हैं मैं उसी तरह इसका बुरा नहीं मानता जैसे पंडित जी संबोधन का. और अंत में जो मिशिर, मिशिर की जन्म की जीववैज्ञानिक दुर्घटना की अस्मिता से ऊपर उठकर इंसान नहीं बन पाते वे घिसिर घिसिर ही करते रहते हैं. मैं कहां पैदा हो गया इसमें मेरा कोई हाथ नहीं है इसलिए इस बात का न तो कोई गर्व है, न ही शर्म.

I am neither Buddha nor a prophet but am an ordinary individual concerned with humanity; right to equal human dignity to all and interested in raising pro-people revolutionary social consciousness. I am authentic atheist free from the fear of God and ghosts, there is no God except in the memories and imaginations of the believers, hence there cant be his any agent-- prophet. Similarly incarnations of Gods are mythological construction.

Do work for some intelligence agency? first of all please know something about Naxals, There are about 2 dozen parties claiming the legacy of revolutionary, spontaneous peasants upsurge at Naxalbari in 1967, CPI(Maoist) is one of them. Please post a separate link to debate, Naxalism and terrorism. This is what is called diversion and sabotage of the discourse. It is youir ignorance to capmpare Naxals with Islamic terrorists who can be compared with only Hindu/Akali terrorists. Jamat-e-Islami is as big danger to the cpountry's composit culture as the RSS. Owaisi is as dangerous as Togadia and Modi. Let me remind you, this post is BJP=Modi.

Congress is as corrupt as BJP and both of them have convergence of interest with corporate model and both compete in being more loyal to imperialist global capital . In fact the ruling class tactic is to overplay their internal differences to blunt the edge of the major contradiction the contradiction of people and imperialism and both are equal patrons of Ambanis and Adanis, both joined hands to dislodge Kejriwal as soon as he filed the cases against Ambani. They are not cousins but twins with only difference that Congress does not have Bajrang dal type organized of warmongering  lumpens. We believe in concrete reality that has to be changed. Rumor mongering is resorted by ideologically bankrupt and the corrupt.
 

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