Sunday, July 15, 2018

मार्क्सवाद 145 (सामाजिक चेतना)

जी, मेरे पिता जी कर्मकांडी ब्राह्मण थे दादा जी उनसे भी बड़े। लेकिन दोनों ही कट्टर नहीं थे। मेरी नास्तिकता को पागलपन समझकर नजरअंदाज कर देते थे। दादाजी मुझे प्यार भी बहुत करते थे। मैंने न्यूटन पर उनसे संवाद पर एक लेख भी लिखा है। गूगल पर 'का रे पगला न्यूटनवा भगवान से भी बड़ा है' कलिक करें मिल जाएगा। घर में ठाकुर का भोग लगे बिना मुख्य रसोई से किसी को कुछ नहीं मिल सकता था। बच्चों के लिए दादी ने एक अलग छोटा चूल्हा बनाया था। 13-14 साल में हॉस्टल में रहते हुए जनेऊ पहने रहने की व्यर्थता समझ तोड़ दिया। हर बार घर आता था दादाजी मंत्र पढ़कर पहना देते। गांव से बाहर निकलकर मैं निकालकर किसी पेड़ पर टांग देता। फिर उन्होंने हाथ से गया समझ बंद कर दिया। मेरी नास्तिकता पसंद तो किसी को नहीं थी लेकिन उसके चलते मुझसे किसी के प्यार में कोई कमी नहीं थी। एक बार (1985-86) तो मेरी दादी और मां मुझे यहकर कि मैं उन्हें विंध्याचल देवी के दर्शन कराऊंगा तो ही करेंगी, वहां ले गयीं। मैंने एक जीप रिजर्वकर अपनी पत्नी और 2 साल की बेटी के साथ उन्हें विंध्याचल ले गया। मेरी नास्तिकता अगर इतनी कमजोर है कि एक मूर्ति के दर्शन से टूट जाए, तो टूटने दो। मेरी पत्नी बहुत धार्मिक हैं। विकास के हर चरण के अनुरूप सामाजिक चेतना का स्वरूप होता है। मनुष्य के चैतन्य प्रयास से विकास का चरण प्रभावित होता है जो सामाजिक चेतना के स्वरूप को बदलता है। मेरा सतत प्रयास सामाजिक चेतना के जनवादीकरण है, जिसके लिए जाति-धर्म की मिथ्या चेतना से मुक्ति आवश्यक शर्त है।

1 comment:

  1. मैंने तो नहीं कहा राकेश सिन्हा ने कुल का नाम डुबोया या मैंने आगे बढ़ाया। मैंने तो तथ्य बताया। पंजीरी खाकर रटा-रटाया भजन गाते-गाते दिमाग के इस्तेमाल की आदत छूट जाती है। कितनी बार साबित हो गया कि जेनयू के नारे प्रायोजित थे संघी घुसपैठियों ने लगाए थे, उसी तरह जैसे युवा वाहिनी का दीक्षित दंगा फैलाने के लिए गाय काटते पकड़ा गया। एबीवीपी के सौरभ शर्मा को वीडियो में पाकिस्तान जिंदाबाद लगाते हुए पहचाने जाने के बाद उस पर प्रशासन ने 10000 का जुर्माना लगाया है। इसके कई वीडियो वायरल है। गाय काते हुए पकड़े गए हिंदू युवा वाहिनी के किसी दफ्तर पर गोरक्षक हत्यारों ने हमला बोला? जलाया किन्ही ब्राह्मणों या दीक्षितों के गांव? न पकड़ा गया होता वह तो मुसलमान गांव जलते? कितने मासूमों की हत्या होती? नफरत की राजनीति के लिए कितनी महिलाओं के साथ सामूहिक बलात्कार होता? आप द्वारा कही गई सभी बातें आपके अफवाहजन्य इतिहासबोध और ब्राह्मणीय श्रेष्ठतावादी पूर्वाग्रहों की उपज है। अपने से सवाल कीजिए कि क्या आप किसी बात पर तथ्यों के आधार पर सत्य बोलते हैं? मैं भी गधों को रगड़-रगड़ कर घोडा बनाने के चक्कर में पड़ा रहता हूं। अब यदि कुछ विवेक सम्मत ज्ञान देना हो या लेना हो तभी मेरी वाल या कमेंट पर कुछ कहें। गुजारिश है। मैं जब कहता हूं कि पढ़े-लिखे जाहिलों का अप्रतिशत अपने अपढ़ साथियों से अधिक है तो बहुत लोग नाराज हो जाते हैं। मेरे लिए पढ़े-लिखे जाहिलों की एक कोटि उन लोगों की है जो उच्च शिक्षा के बावजूद इतना नहीं जान पाते कि व्यक्तित्व का निर्माण सामाजीकरण से होता है, जन्म की जीववैज्ञानिक दुर्घटना के आधार पर नहीं, और कर्म-विचार के आधार पर व्यक्तित्व का मूल्यांकन की बजाय जन्म के आधार पर करते हुए जन्मजात प्रवृत्तियों से ऊपर नहीं उठ पाते। Viren N Tiwari.

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