Thursday, July 19, 2018

मोदी विमर्श 87 (अग्निवेश पर प्रायोजित हमला)

एक सज्जन ने अग्निवेश पर हमले के पक्ष में कहा आस्था की खिल्ली उड़ाना भी हिंसा है, वही क्रिया-प्रतिक्रिया का अटलीय कुतर्क। कहा जिसका तर्क न हो वह गलत नहीं होता।

Pavanjay Tripathi इसमें किस धर्म की खिल्ली उड़ाई गयी हैंं? तो तर्क के परे है वह अज्ञान और कुज्ञान होता है। इस पोस्ट में कुछ बजरंगी अपराधियों द्वारा एक 80 वर्षीय सन्यासी की पिटाई और गाली-गलौच की बात की गयी है। एक अपराध का समर्थक मनसा अपराधी है। संयोग से (?) ऐसे अपराधियों में तथा कथित ब्रह्मज्ञानियों की तादात काफी है। बाभन से इंसान बनना मुश्किल जरूर है लेकिन सुखद। वरना पंजीरी खाकर आजीवन रटा-रटाया भजन गाते रहिए।

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