Monday, July 24, 2017

मार्क्सवाद 62

मार्क्सवादी हूं कि नहीं मैं नहीं जानता लेकिन लेनिन की परिभाषा में कम्युनिस्ट नहीं हूं क्योंकि लगभग 3 दशक से किसी पार्टी में नहीं हूं। मार्क्सवाद एक गतिमान विज्ञान है, एंगेल्स ने कहा है कि मार्क्सवादी मार्क्स के उद्धरण देना वाला नहीं बल्कि वह है जो खास हालात में वही करे जो मार्क्स करते।वर्चस्व और शासक का हमला हमेशा की स्तरों पर होता है, इसलिए प्रतिरोध भी हर स्तर पर होना चाहिए। नवउदारवादी भूमंडलीय पूंजी, जैसाकि विश्वबैंक के रखैल नव-राजनैतिक अर्थशास्त्री मानते है कि संकट की इस घड़ी मे अधिनायकवादी शासनों की बैशाखी पर ही खड़ी रह सकती है, इस लिए सभी मोर्चों पर लड़ने की जरूरत है, लेकिन मार्क्स का कहना है कि जनता अपनी लड़ाई खुद लड़ेगी लेकिन उसके लिए सामाजिक चेतना के जनवादीकरण की जरूरत है जो अभी तो मोदी-योगी मय है। तीनों मोर्चों पर -- आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक -- लड़ना पड़ेगा, जयभीम लाल सलाम नारे को सैद्धांतिक संगठनात्मक रूप देना पड़ेगा। एक बार जनता लड़ाई के लिए मन बना ले, संशोधनवादी खुद-ब-खुद अदृश्य हो जायेंगे। लंबा रास्ता है, नई शुरुआत की जरूरत है।

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