Sunday, December 18, 2016

शिक्षा और ज्ञान 94 (कविता)

एक सज्जन ने फेसबुक की अपनी पोस्ट में लिखा, "राजनैतिक दृष्टि को कविता में परोसने वाले अक्सर घटिया कविता ही लिख पाते हैं. उस पर:

ऐंतोन चेखव कला के लिए कला को सामाजिक अपराध मानते थे. स्वांतः सुखाय लिखने वाले लोग लिख कर फाइल में रख लें, सुख लेना हो तो निकाल कर पढ़ लें. पाश ने लिखा कि लोग सुरेंद्र शर्मा की कविताएं भूल जाएंगे क्योंकि वे एक लड़की से प्यार की कविता है और उनकी कविताएं याद रखेंगे क्योंकि वे सारे जहां से प्यार की कविताएं हैं जिनमें महबूब का भी प्यार शामिल है. फिर तो आप मजज़ाज, शाहिर, फैज, नागार्जुन, दुष्यंत, हबीब जालिब, इब्नेइंशां, गोरख, अदम, देबी प्रसाद मिश्र........... की कविताओं को या तो राजनैतिक नहीं मानते या घटिया म्ानते हैं. मान्यवर, राजनीति हमारा जीवन नियंत्रित करती है, जब भी सामाजिक सरोकार की रचना होगी वह राजनीति से परे नहीं होगी. अराजनिकता बहुत खतरनाक राजनीति होती है, रीढ़विहीन. शोषक-शोसित की विभाजन रेखा खिंची हुई है सबको अपना पक्ष तय करना है. 

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