Monday, October 1, 2018

मोदी विमर्श 92 (योगी का ठोंकतंत्र)

उप्र पुलिस ने योगी शासन में 2000 से 'मुठभेड़ों' को अंजाम दिया जिनमें 6-7 दर्जन से अधिक 'इनामी' बदमाश मारे गए, सभी मुठभेड़-हत्याओं के यफआईआर एक से। योगीजी ने कुर्सी पर बैठते ही एक-एक को 'ठोंक' देने का ऐलान किया था। यह किसी उच्च संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति की भाषा है? योगी ने पुलिस को ठोंक-ठाक कर्मी बना दिया। पुलिस वाले 'अपराधियों' को ठोंकने लगे और हिंदू युवा वाहनी टाइप के लोग मुसलमानों और दलितों को। अब 10 आदेश से ठोंकेंगे तो एक अपने मन से भी। अब एकाध कोलेटरल डैमेज तो हो ही जाता है। योगी जी को इतना तो मालुम होना चाहिए कि पुलिस का काम घर से उठाकर ठोंकना नहीं है, पकड़कर बंद करना है, फैसला देने का काम अदालत का है। विवेक तिवारी की हत्या पर मध्यवर्ग थोड़ा कुनमुनाया है और पुलिसिया बयान पर सवाल उठाने लगा है। साथियों अगर हम 'ठोंकने' की संस्कति के विरुद्ध नहीं जागे और लामबंद न हुए तो कल कोई भी ठोंका जा सकता है।

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