Tuesday, May 7, 2013

शुक्रगुजार हूँ तुम्हारी नफ़रत के लिए


शुक्रगुजार हूँ तुम्हारी नफ़रत के लिए

कल ही लिखा था अंतिम अंतिम विदा गीत
यादों के झरोंखों में धुंधली पड गयी
आज ही तुम्हारी तस्वीर
गायब हो जायेगी कल-परसों तक
नहीं करेगी नीद खराब अब बर्षों तक
शुक्रगुजार हूँ तुम्हारी नफ़रत के लिए
बने रहते यदि वैसे ही तटस्थ
न होता चरितार्थ
अंतिम, अंतिम विदागीत के
शीर्षक का संकल्प
मैं नफ़रत तो नहीं लौटा सकता
लेकिन सहता रहूँगा
तुम्हारे विरुद्ध एक-एक नाइंसाफी के
अपराधबोध का भार
तुम्हारा प्यार उल्लासित था
नफरत एक चुनौती
[ईमि/०८.०५.२०१३]



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