Tuesday, December 23, 2014

In my intense solitude today

In my intense solitude today
thought to be romantic for a change
and just thought of you
thought of your vagabond ideas and restless soul
also thought of need to give a perspective to vagabondism
and the need to make restlessness  creative
of course how can I not think of the intensely intimate kiss
in the solitude just thought of you
सोचा था  कि आज की  तन्हाई में देखूंगा नया खाब
करूंगा नहीं गम-ए-जहाँ का आज हिसाब
चढूँगा  ख्यालों की सीढियां बेहिसाब
मगर आने लगी मुझे सिर्फ तुम्हारी याद
अजीज़ लगे थे तुम्हारे आवारा ज़ज्बात
और बेचैन कर दी तुम्हारे मन की बेचैनी की बात
सोच रहा था उस अन्तरंग चुम्बन का सवाल
मच गया मन में सवालों का बवाल

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