Thursday, September 26, 2013

भगत सिंह के जन्मदिन के उपलक्ष्य में

भगत सिंह के जन्मदिन के उपलक्ष्य में

भगत सिंह का सपना था एक शोषणमुक्त समाज
बढ़ता ही जा रहा है मगर शोषण दमन का राज
सोचा था भगत सिंह ने मिल साथियो के संग
शहादतें इंक़िलाबी नवजवानों की दिखलायेंगी रंग
गये अंग्रेज मगर छोड़ गये तामझाम
रंग गये उसी रंग में सभी देसी हुक्मरान
मिल मज़हब के ठेकेदारों से कराया रक्तपात
रुक नहीं रही तब से फिरकापरस्ती की उत्पात
इतिहास दुहराता नहीं खुद को सच है यह बात
प्रतिधवनियां मचाती हैं उससे ज्यादा खुराफात
ले लिया इतिहास ने पूरा एक चक्कर
गुलामी आयी है अब भूमंडलीय पूंजी बनकर
नहीं है अब किसी क्लाइव लॉयड की दरकार
सारे सिराजुद्दौला भी बन गये हैं मीरज़ाफर
नहीं है मगर अब भी निराशा की कोई बात
धधकेंगे ही नवजवानों में इंक़िलाबी ज़ज़्बात
शहादतें भगत सिंहों की जाती नहीं बेकार
सपना शोषण-मुक्त समाज का होगा साकार
सारी हदें पार कर चुकी है अब सरमायेदारी
जल्दी ही आयेगी अब इसके विनाश की बारी
समझेगा मेहनतकश इसकी भूमंडलीय चाल
निकल पड़ेगा दुनिया भर में ले इंक़िलाबी मसाल
स्वाहा हो जायेंगे भूमंडलीय पूंजी के महल-ओ-किले
भस्म हो जायेंगे देसी कारिंदों के सारे काफिले
ख़ाकनसीनों की बस्ती में होगी तब चहल-पहल
न होगा कोई भूखा नंगा न राजा न ही रंक
होगा भगत सिंह का सपना साकार तब
मानव-मुक्ति का परचम लहरायेगा जब
दिया था भगत सिंह ने ज़ुल्म के मातों का वास्ता
क्रांतिकारियों के पास नहीं है और कोई रास्ता
याद रखेंगी नई पीढ़ियां को भगत सिंह की यह बात
पैदा करती रहेगी जो उनमें इंक़िलाबी जज़्बात
भगत सिंह को लाल सलाम लाल सलाम
इंक़िलाब ज़िंदाबाद ज़िंदाबाद ज़िदाबाद
[ईमि/26.09.2013]

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