Saturday, October 5, 2019

शिक्षा और ज्ञान 250 (शिशुमंदिर)

मैं तो हमेशा विषय पर ही बात करता हूं, आप ही ऐसी प्रतिक्रिया देते हैं जैसे मैंने आपकी फसल काट ली हो? शाखा की ड्रिल से बंद दिमाग मेहनत से खोला हूं और खुला ही रखता हूं। विद्यालय की गुणवत्ता शिक्षक से होती है, शिशुमंदिर के जिक्र में उनकी तनखाह पूछना विषयांतर कैसे हो गया? मुनाफाखोर छोटे-मोटे निजी स्कूलों की ही तरह शिशुमंदिर भी शिक्षकों का शोषण तो नहीं करते? यदि शिक्षक घर चलाने के लिए पूरक आय की चिंता में रहेगा तो कितने मुक्त दिमाग से 'निर्भीक' नागरिक बनाएगा? आप जैसे सचेत नेताओं को शिक्षकों का समुचित वेतन सुनिश्चत करने का हर संभव दबाव बनाना चाहिए जिससे सम्मानजनक जिंदगी की उनकी न्यूनतम जरूरतें पूरी हो सकें। मेरे एक साले साहब (रिटायर्ड प्रिंसिपल) कई जिलों की किसी इकाई के कुछ हैं, मैंने उनसे भी यही आग्रह किया था।

Akhilesh Pandey वह तो है, उसके अलावा मैंने शिक्षको का वेतन पूछ दिया जो आपको अच्छा नहीं लगा। ब्रेनवाशिंग का जो काम शिशुमंदिर करता है वही मदरसे भी करते हैं। Markandey Pandey शिक्षकों की पगार अब भी उतनी ही है। मार्च-अप्रेल में घर गया था तो मेरे साले साहब से मिलने जौनपुर जिले के कुछ शिशुमंदिरों के प्रिंसिपल आए थे, वे अपनी 10,000 (या 12000) पगार से व्यथित थे। जैसे ही उन्हें लगा मैं 'बाहरी हूं' वे संभल गए।

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