Friday, May 18, 2018

ईश्वर विमर्श 58 (राम)

रामायण के राम एक ऐसी संस्कृति के प्रतिनिधि हैं जहां स्त्री मूल्यवान वस्तु होती है, जिसे वेटलिफ्टिंग प्रतियोगिता में जीता जाता है, मनुस्मृति के अनुसार जिसकी आजादी समाज के ताने बाने को नष्ट कर देती है, इसलिए उसे हमेशा अधीन जीवन बिताना पड़ता है। अग्नि परीक्षा के बाद भी जिसके चरित्र पर संदेह बना रहता है और उसे गर्भवती कर किसी बहाने घर से निकाल देना वाछनीय माना जाता है। सूर्पनखा ऐसी संस्कृति का प्रतिनिधित्व करती है जहां स्त्रियां प्रणय निवेदन कर सकती थीं, यह पितृसत्तात्मकता को कैसे बर्दाश्त होता। राम के नाम पर ही हिंदुत्व आतंकवाद राजनैतिक शक्ति बन गया।

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