Saturday, November 16, 2019

लल्ला पुराण 292 (जेएनयू)

इस ग्रुप में भी कई लोग जेएनयू के वयोवृद्ध छात्रों की बात करते नहीं थकते, मुझे पिछले 43 सालों स्टडी लीव पर पीएचडी करने आए कुछ शिक्षकों के अलावा 27-28 से से अधिक उम्र के कोई छात्र-छात्रा नहीं मिले। वैसे अमीमन 20-21 मे बीए के बाद जेएनयू में एडमिसन लेने पर कितने साल में कोई एमए (अमूमन 2 साल), एमफिल (अमूमन 2 साल) पीएचडी (अमूमन 4 साल) की पढ़ाई पूरी करेगा? मैंने चूंकि इवि पीजी और एक साल आपातकाल में भूमिगत रहने के बाद जेएनयू में एमए में दाखिला लिया था इसलिए एमफिल/पीएचडी के दौरान अपने सहपाठियों में सबसे उम्र-दराज छात्र था। इवि में 1972-73 में चुनाव नहीं हुए क्योंकि जगदीशचंद्र के निष्कासन वापसी का आंदोलन चल रहा था, 'दीक्षित नहीं, चुनाव नहीं'। दीक्षित जी के विवि मे प्रवेश वर्ष के बारे में कई कहानियां थीं कोई 1955 बताता था तो कोई 1956। इस ग्रुप मे श्री श्यामकृष्ण पांडेय लर ही इस बारे में प्रामाणिक जानकारी दे सकते हैं। मैं 1972 में जब विवि में दाखिला लिया तो श्री रामाधीन सिंह, श्री अनुग्रह नारायण सिंह, श्री लक्ष्मीकांत ओझा (दिवंगत), श्री ब्रह्मानंद ओझा, परमानंद मिश्र, विरेंद्र मिश्र आदि लोग विश्व्द्यालय में सीनियर एवं स्थापित छात्र नेता थे, ये सब 1980 के दशक में छात्रसंघ के पदाधिकारी बने, ये कितनी उम्र तक विश्वविद्यालय में रहे होंगे और क्या-क्या कोर्स कर रहे होंगे? जहां तक मुझे मालुम है इनमें से किसी ने पीएचडी नहीं किया, बुड्ढा कहे जाने वाला कन्हैया 28 में तथा उमर 27 में डॉ. हो गया। किसी ने जेएनयू के बुड्ढे छात्रों का नरेटिव शुरू किया, सब वही भजन गाने लगे। जेएनयू पहुंचकर कई आश्चर्यों के साथ एक आश्चर्य यह भी हुआ था कि वहां गंभीर पढ़ाकू किस्म के लोग छात्रसंघ का चुनाव लड़ते थे। इलाहाबाद के जो भी मित्र यूपीएससी का इंटरविव देने जाते प्रायः मेरे यहां रुकते। एक बार जीएन झा के एक सीनियर, वीपी सिंह (अब रिटायर्ड पीसीएस) चुनाव के समय वहां थे, चाय के ढाबे पर चुनाव की बातचीत में बोले, 'अबे, यहां तो कोई भी चुनाव लड़ सकता है'। मैंने कहा, 'वह तो कहीं भी कोई भी लड़ सकता है'। वे बोले थे कि हारना-जीतना तो हर जगह होता है, लेकिन यहा मार खाने का खतरा नहीं है। इस पोस्ट का मकसद आप सब से आग्रह करना है कि जेएनयू के बारे में प्रचारित अनर्गल नरेटिव्स के आधार पर अगंभीर टिप्पणियां न करें। वहां कंडोम, दारू, गांजा खोजने जाने के पहले वहां जाकर वहां के किन्ही 2-4 लड़के-लड़कियों से बात कर लें, उनके पोस्टर पढ़ लें, गीत या भाषण सुन लें। वहां हमारे आपके ही बच्चे पढ़ते हैं। हम पहले दशक के जेएनयूआइट हैं वहां के डेमोक्रेटिक एकेडमिक कल्चर की हमलोगों ने बुनियाद रखी है।

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