Tuesday, May 10, 2022

शिक्षा और ज्ञान 355 (स्वार्थ और परमार्थ बोध)

 एक मित्र ने एक पोस्ट में अपने एक जन्मना ब्राह्मण मित्र द्वारा ब्राह्मणवाद की आलोचना को विरासत में मिले जन्मजात पूर्वाग्रहों से मुक्ति के दावे की तुलना पर्शिय-स्पार्टा युद्ध (शायद 5वीं सदी ईशापूर्व) में पर्शिया समर्थक एक कुबड़े स्पार्टन से की, जिसे विजयोपरांत पर्शियन्स ने मार डाला था। उस पर यह कमेंट लगभग लिख चुका था कि शायद पोस्ट डिलीट कर दी गयी और यह कमेंट पोस्ट नहीं हो पाया। उसे यहां शेयर कर रहा हूं।


यह अपने उन मित्र की बात की बहुत ही फूहड़ और बचकाना तथा दुराग्रहयुक्त व्याख्या है।व्यक्तिवाद, वर्गविभाजित आधुनिक और परा-आधुनिक (modern & post modern) या दार्शनिक अर्थों में क्रमशः उदारवादी और नवउदारवादी समाजों का मूलमंत्र है तथा आधुनिक और परा-आधुनिक व्यक्तित्व का निर्धारक तत्व, जिससे संपूर्ण मुक्ति अव्यवहारिक है। विभाजित (split) समाज में हर व्यक्ति का व्यक्तित्व भी "स्व के स्वार्थबोध और स्व के परमार्थबोध या न्यायबोध" में विभाजित (split) होता है। सामान्यतः सामान्य व्यक्ति स्व के परमार्थबोध पर स्व स्वार्थबोध को तरजीह देने में सुख तलाशता है। , लेकिन इसमें उसे सुख का भ्रम (Illusion of pleasure) मिलता है, क्योंकि वास्तविक सुख "खाओ-पियो-मस्त रहो" सूक्ति में नहीं, बल्कि अपने नैतिक स्वत्व की प्राप्ति में मिलता है, जिसे स्व के स्वार्थबोध पर स्व के परमार्थबोध को तरजीह देकर प्राप्त किया जा सकता है। यदि जन्म के संयोग से आप एक पुरुष के रूप में पैदा हुए हैं तो स्व के स्वार्थबोध को स्व के परमार्थबोध पर तरजीह देकर या पुरुषवादी (मर्वादी) पूर्वाग्रहों के प्रभाव में आपको पितृसत्तात्मक समाज की यौन आधारित (स्त्री विरोधी) भेदभाव की विद्रूपताएं जायज लगेंगी। लेकिन यदि समाज में व्याप्त मर्दवादी (पितृसत्तात्मक) पूर्वाग्रहों से मुक्त होकर विचार करेंगे तो पितृसत्तात्मक (मर्दवादी) मान्यताओं की निष्पक्ष आलोचनात्मक समीक्षा कर सकेंगे। वही बात भेदभावपूर्ण वर्णाश्रमी समाज में ब्राह्मणवादी (जातिवादी) समाज में जन्मना ब्राह्मण होकर यदि स्व के स्वार्थबोध पर स्कोव के परमार्थबोध को तरजीह देंगे तो ब्राह्मणवादी (जातिवादी) पूर्वाग्रहों के मुक्त होकर ब्राह्मणवाद (वर्णाश्रमवाद) की आधुनिक राजनैतिक अभिव्यक्तियों -- जातिवाद तथा जवाबी जातिवाद (ब्राह्मणवाद तथा नवब्राह्मणवाद) एवं सांप्रदायिकता की निष्पक्ष आलोचनात्मक समीक्षा कर सकते हैं।

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