यूरोप में नवजागरण तथा प्रबोधन क्रांतियों नें जन्म (जाति)आधारित सामाजिक भेदभाव खत्म कर दिया था, इसीलिए मार्क्स ने लिखा कि पूंजीवाद ने सामाजिक विभाजन का सरलीकरण कर समाज को पूंजीपति तथा सर्वहारा के दो विपरीत खेमों में बांट दिया। भारत में उस तरह का नवजागरण नहीं हुआ तथा जन्म आधारित भेदभाव का मुद्दा अंबेडकर ने उठाया। अब सामाजिक और आर्थिक न्याय के अलग अलग संघर्षों का समय नहीं है, दोनों संघर्षों में एका स्थापित करना होगा। जय भीम लाल सलाम नारा उस एकता का प्रतीक है।
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