Saturday, October 30, 2021

 Arvind Rai किताबें "मारने " के बावजूद, वह पढ़ने-लिखने वाला प्रिय मित्र था, पिछली साल 65 से कम उम्र में उसकी अकाल मृत्यु हो गयी। रूसो की आत्मकथा 'द कन्फेन्स' खरीदने के तीसरे दिन एक सज्जन बहुत जिद करके 3 दिन के लिए मांग कर ले गए। उनका नाम उस किताब के साथ याद है। वह मैंने दुबारा नहीं खरीदा और लाइब्रेरी में पढ़ा। 10 साल बाद (1991-92 में कभी) मुलाकात हुई तो पूछे मैं उन्हें पहचाना क्या क्या? मैंने कहा था, धोखे से अपनी किताब चुराने वाले किसी को मैं नहीं भूलता। एक विरले संयोग में 1980 में खोई एक पुस्तक (द रेचेड ऑफ द अर्थ) दरियागंज संडे मार्केट में 1990 में मिल गयी। जीवन में असंभव से दिखने वाले विरले संयोग के कुछ और अनुभव कभी शेयर करूंगा।

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