Friday, January 15, 2021

ईश्वर विमर्श 98 (रक्तपात)

 किसी ने कहा कि भगवान इंसानों की धड़कनें नियंत्रित करता है, निर्जीव में जान डालकर उसे सजीव बना सकता है, उस पर :

किसी निर्जीव को सजीव बनाने की बात छोड़िए किसी बीमार को स्वस्थ कर दे तो भी मैं उसे मान लूंगा। यदि इतना ही शक्तिमान है तो कोरोना का ही विनाश कर दे। सम्मान भय से ही पैदा होता है। मेरा भूतका भय 13 साल की उम्र में खत्म हो गया भगवान का 17-18 की। भगवान ने मनुष्य को नहीं बनाया बल्कि मनुष्य ने अपनी ऐतिहासिकजरूरतों के अनुसार भगवान की अवधारणा का निर्माण किया। इसीलिए देश-काल के अनुसार उसका स्वरूप और चरित्र बदलता रहता है। पहले भगवान निर्बल और असहाय की सहायता करता था अब सक्षम और सबल की। उसके विभिन्न स्वरूपों के भक्त अपने अपने स्वरूप की श्रेष्ठता को लेकर लड़ते खून-खराबा करते रहते हैं। यूरोप में 17वीं-18वीं सदी में एक ही धर्म के भगवान और उसके ग्रंथ (बाइबिल) की अलग अलग व्याख्या के अनुयायियों के बीच भयानक रक्तपात हुआ। शैवों और वैष्णवों के संघर्ष की भी कई कहानियां हैं। इस्लाम में पैगंबर की विरासत के लिए कर्बला का भयानक रक्तपात सुविदित है। यदि खुदा ने ही बंदों को बनाया होता तो उसके दो तरह के बंदे (शिया-सुन्नी) आपस में इतना भयानक रक्तपात क्यों करते?

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