Tuesday, January 19, 2021

मार्क्सवाद 238 (स्त्री विमर्श)

 सनी लिओनी को मैं जानता नहीं, उसे आप महिला सशक्तीकरण की मिशाल बता रहे हैं तो जानते होंगे कि सनी लियोनी कौन है? और महिला सशक्तीकरण के लिए आपको कुछ करने की जरूरत नहीं है वे खुद मर्दवादी रूढ़ियों, असमानताओं और लैंगिक भेदभाव को तोड़कर सशक्तीकरण हासिल कर रही हैं। जीवन के हर क्षेत्र में मर्दवादी पूर्वाग्रह-दुराग्रहों को सशक्त चुनौती दे रही हैं। हमारे छात्र-काल से अब तक स्त्री प्रज्ञा और दावेदारी के अभियान का रथ पर्याप्त दूरी तय कर चुका है जिसका वेग मर्दवादी विघ्नबाधाओं को तिनकों की तरह उड़ा देगा। सीता और सावित्री किस्म की पतिव्रतत्व के चरित्र पुरुषवादी मानसिकता की पुष्टि के लिए गढ़े-प्रचारित किए जाते हैं, जिसमें गर्भवती कर पत्नी को घर से निकालना प्रशंसनीय बताया जाता है। संस्कारगत मर्दवादी पूर्वाग्रहों से ऊपर उठकर इस तरह के आदर्शोँ के मर्दवादी निहितार्थ समझ सकेंगे। मर्दवाद कोई जीववैज्ञानिक प्रवृत्ति नहीं है बल्कि एक विचारधारा है जिसे नित्य-प्रति के व्यवहार, विमर्श, रीति-रिवाजोंं, सांस्कृतिक मूल्यों और कर्मकांडों द्वारा निर्मित-पुनर्निर्मित एवं पुष्ट की जाती है।

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