Sunday, January 24, 2016

फुटनोट 63

Sandeep Yadav बंददिमाग भक्तिभाव अमानवीय असंवेदनशीलता का श्रोत है. बाहुबल से विचारों का विरोध  गुंडागर्दी होती है. लेकिन जब तक दिमाग में सालों से भरा गाय का गोबर नहीं साफ़ करोगे इसी  तरह का कुतर्क करोगे. रोहित आतंकवाद  का समर्थन नहीं कर रहा था बल्कि फांसी की सज़ा का विरोध  कर रहा था. फांसी की सज़ा मध्ययुगीन बर्बरता है, जिसे सभ्य  देशों में खत्म कर दिया गयाहै. मैं भी उन असंख्य लोगों में हूँ जो फांसी की बर्बर सज़ा के विरोधी हैं. हम वीभत्स  नरसंहार-बलात्कार के आयोजक नरेंद्र मोदी तथा अमित शाह को भी फांसी की सज़ा मिलती तो उसका भी विरोध करते. बर्बरता  का जवाब बर्बरता नहीं होती. भोजन का चुनाव किसी का जनतांत्रिक अधिकार है. रिग्वेदिक ब्राह्मणों  का प्रिय भोजन  गोमांस था. गोमांस खांने वालों की ह्त्या  करनी है तो ओबामा से शुरू करो जिसके सामने सरकार  नतमस्तक रहती है. अमेरिका और यूरोप में गोमांस भोजन का प्रमुख हिस्सा है. तुम्हारा यह बेहूदा  कुतर्क कि अगर हास्टल से निष्कासन के कारण रोहित वेमुला को आत्म-ह्त्या  करनी होती तो पहले ही कर  लेना चाहिए था एक महीने क्यों  लगा दिया तुम्हारी अमानवीय संवेदनहीनता तथा घोर दिमागी दिवालियेपन का  द्योतक है. यह  वैसा ही बेहूदा कुतर्क  हैजैसे तुमसे कई  पूछता कि नेत्राहीनों को मिलने वाली सुविधा से वंचना की शिकायत करनी ही थी तो मनुस्मृति इरानी के आने तक्ल इंतज़ार क्यों किया? जिसकी चिट्ठी को आदेश  मान उसके निजी चाकर की तरह कुलपति ने ५ दलित लड़कों को निलंबित  कर हास्टल से निकाल दिया. जान सबको सबसे अधिक प्यारी होती है जिसे कोई जीना असह्य होने पर ही त्यागता है. रोहित एक लेखक बनना चाहता था, समतामूलक विचारों के प्रशार के लिए. एक मेधावी दलित की  इंसानी प्रतिष्ठा पर कितनी चोट लगी होगी जो उसे जान पर भारी लगी. तुम  शाखामृग तो नहीं हो? ऐसी संवेदनहीनता  तथादुर्वुद्धि शाखाओं में ही बिकती हैं.

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