राहुल गांधी निःसंदेह वैकल्पिक नेता के रूप में उभरा है। हम भी गए थे,साथ में जोशीजी (राम शरन जोशी); हिंदू के पूर्व पत्रकार सुंदर राजन और जेएनयू के मित्र अजय कुमार (रिटायर्ड आयकर आयुक्त) थे। वोटचोर से गद्दी छोड़ने की गुहार लगाती, आती-जाती भीड़ की रेलापेली में में हम लोग कई बार कई प्रवेश द्वारों तक पहुंचे, उसके आगे न जा पाए। 83 वर्षीय जोशी जी भीड़ चीरकर इधर-उधर करके रास्ता बनाने में हम सबको पीछे छोड़ रहे थे। मंच तक पहुंचकर वीडियो बनाकर लौटे एक पत्रकार ने 8 से 10 लाख लोगों के आने का अंदाज लगाया। यह वाकई अभूतपूर्व रैली थी। झंडों में सबसे ज्यादा लाल झंडे लगे थे।
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