54 साल पहले, 29 मई 1972 को हमारी शादी हुईं थी. विवाह के दिन मेरी उम्र 16 साल 11 महीने 3 दिन यानि लगभग 17 वर्ष थी, सरोद जी की इससे साल-6 महीने कम ही रही होगी। पिछले सालों में अपने विवाह के बारे में काफी-कुछ लिख चुका हूं, इस विषयमें कुछ और लिखने में पुनरावृत्ति की काफी संभावनाएं हैं। मौजूदाै पीढ़ी के युवकों को ऐसी शादियां अजूबा परिघटनाएं लगेंगी लेकिन, इतिहास की गतिविज्ञान के लिहाज से 54 साल लंबा समय है। हमारे बचपन का ऐतिहासिक चरण आर्थिक-सांस्कृतिक रूप से पूर्व-आधुनिक वर्णाश्रमी, सामंती चरण था और बदलाव की हवा बहना शुरू हो गयी थी। औपनिवेशिक शिक्षा नीति का एक सकारात्मक उपपरिणाम था, शिक्षा की सार्वभैमिक सुलभता, जिसके असर दिखने लगे थे। मैं इंडरमीडिएट (कक्षा 12) की परीक्षा देकर घर आया तो विवाह का कार्ड छप चुका था। असफल विद्रोह की कहानी फिर कभी।हम लोगों ने न तो शादी के पहले एक दूसरे को देखा था न शादी के लगभग 3 साल बाद गौने तक। 28 फरवरी, 1975 को हमारा गौना हुआ तब हम दोनों ने एक दूसरे सा बातचीत की शुरुआत किया। मैंने कहा सरोज जी, उन्होंने कहा हां। तभी से मैं उन्हें सरोज जी ही कहता हूं क्योंकि किसी को संबोधन की जो आदत पड़ जाए वह स्थाई हो जाती है। गौने के बाद भी, काफी दिन, अन्यान्य कारणों से हम साथ नहीं रहते थे, जब हमारी बड़ी बेटी स्कूल जाने की उम्र की हो गयी तब से हमने साथ रहना शुरू किया। 39 साल से हम साथ रह रहे हैं सरोज जी का बड़प्पन है कि थोड़ा-बहुत नोंक-झोंक के साथ मुझे इतने सालों से झेल रही हैं। उम्मीद है बाकी जिंदगी भी हंसी-खुशी कट जाएगी, सरोज जी को साभार शुभकामनाएं।
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