Friday, December 26, 2025

शिक्षा और ज्ञान 386 (कैलीगुला)

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How to Lose a Country: The Seven Steps from Democracy to Dictatorship में एर्दोआन की मिशाल से एसे टेमेलकुरान (Ece Temelkuran) द्वारा वर्णित जनतंत्र से तानाशाही की यात्रा के सात कदम मौजूदा और ऐतिहासिक अतीत सभी तानाशाहों के उत्थान की कहानी है, लेकिन हर तानाशाही के हर उत्थान के बाद के बाद उसका पतन भी होता है। लेकिन उत्थान के पतनशील शीर्ष तक पहुंचने के तक यह मानवता को कितना घायल करता है इसका सही आकलन मुश्किल है और घाव कितनी पीढ़ियों के मगहम से भरेगा, यह कहना भी मुश्किल है। इन सात कदमों के अलावा हर तानाशाह इतिहास के विकृतीकरण का काम भी करता है। 2014 में सत्ता पर काबिज होने के बाद भारत की मौजूदा सरकार ने इतिहास पुनर्लेखन कमेटी गटित किया जिसका घषित उद्देश्य ज्ञात-अज्ञात अतीत में महानताओं का अन्वेषण करना या इतिहास का पुनर्मिथकीकरण है। किसी आबादी को गुलाम बनाने के लिए उसे उसके इतिहास से वंचित करना हर तानाशाह की अनिवार्य नीति होती है, इतिहास के महानायकों का खलनायकीकरण होता है और खलनायकों-गद्दारों को महानायक बनाकर पेश किया जाता है। प्राचीन रोम में एक सम्राट था कैलीगुला जो खुद को भगवान मानता था और अपनी सत्ता को शाश्वत। कहता था कि उसे लोगों की नोफरत की परवाह नहीं, बशर्ते वे उससे डरते रहें, लेकिन वह नहीं जानता था कि अतिशय घृणा भय का बांध तोड़ देती है। उसे उसके अंगरक्षकों ने ही उसे रोम के चौराहे पर कत्ल कर दिया और किंवदंतियों के अनुसार, लोगों में उसके मुंह में मूतने की होड़ लग गयी थी।

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