Thursday, February 2, 2023

रईस

 जो खानदानी रईस होते हैं

उन्हें संस्कार में मिलते हैं
हरामखोरी के पारंपरिक सलीके
जिसकी गौरवगाथा के होते हैं पुराने तरीके
जो होते हैं नए धनाढ्य
वे खुद सीखते हैं हरामखोरी के सलीके
सरकारी कृपा के नायाब तरीके।
जो होते नहीं किसी भी किस्म के रईस
न खानदानी न नवधनाढ्य
करते नहीं किसी किस्म की हरामखोरी
मेहनत मजूरी से रोजी कमाते हैं
ओर झेलते हैं अवमानना तथा तिरस्कार
हर तरह के हरामखोरों की
लेकिन होती नहीं उनके पास फुर्सत
इसपर ध्यान देने की

7 comments:

  1. जी नमस्ते ,
    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल रविवार (०५ -०२-२०२३) को 'न जाने कितने अपूर्ण प्रेम के दस्तक'(चर्चा-अंक-४६३९) पर भी होगी।
    आप भी सादर आमंत्रित है।
    सादर

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  2. ईश मिश्रा जी, आपकी रचना से रइसों के प्रकार का पता चलता है. 🙂

    मेरी आवाज में संगीतबद्ध मेरी रचना 'चंदा रे शीतल रहना' को दिए गए लिंक पर सुनें और वहीं पर अपने विचार भी लिखें. सादर आभार 🌹❗️--ब्रजेन्द्र नाथ

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