Wednesday, March 15, 2023

तन्हाई

 काटने को दौड़ता है अकेलापन यदि तब्दील नहीं हो पाता तन्हाई में

होकर तब्दील तन्हाई में कुम्हार बन कविता निकाल देता है अकेलापन

Sunday, March 12, 2023

मार्क्सवाद 283 (नास्तिकता)

 फेसबुक पर एक नास्तिकता का ग्रुप है, उसके कुछ अग्रणी लोगों ने एकबार (अक्टूबर, 2019) आभासी दुनिया से निकलकर वास्तविक दुनिया में 'गुफ्तगू' नाम से एक कार्यक्रम आयोजित किया था। उसमें मैंने कहा था कि हमारा काम नास्तिकता का नहीं वैज्ञानिक चेतना का प्रसार करना है। वैसे भी हमारा हमारा प्रमुख सरोकार जनपक्षीयता है और नास्तिकता जनपक्षीयता की गारंटी नहीं है।

शिक्षा और ज्ञान 398 (संविधानेतर गिरफ्तारियां)

 पिछले साल की पोस्ट


अगर आपको 35 साल तक किसी अंधेरी अंधी सुरंग में रहना पड़े... और दफ्तअन, एक दिन कहा जाए कि जाओ अपनी रोशनी वाली ज़िन्दगी में लौट जाओ, और आप 12775 दिन का यह तवील फासला तय कर अपने शहर के अपने मोहल्ले में अपने घर लौटें तो क्या पाएंगे? और क्या महसूस करेंगे? आपको अपना ही शहर किस कदर अनजाना लगेगा? आपको अपना मोहल्ला पहचानने में कितना वक्त लगेगा? आपको अपने ही घर का चौखट कितना क़रीब और कितना अजनबी लगेगा?

सत्ता और सियासत की अपनी रणनीति होती है... क्या पता कब कौन उसका मोहरा बन जाए! कब रात के अंधेरे में आपका या मेरा दरवाज़ा खटखटाए...और जब आप इस दरवाज़े से बाहर जाएं तो दरवाज़ा 20-20, 30-30 साल तक आपके आने का इंतज़ार करने के लिए शापित हो जाए!

ऐसे मकान सैकड़ों हैं जो साल दर साल अपने मकीन का इंतज़ार कर रहे हैं।

ऐसे ही ये सिख भाई हैं जो 35 बरस लंबा अंधेरा काट कर लौटे हैं। उन्हें बेकसूर ठहराया गया है। अगर एक नहीं, दो नहीं, 30-30 लोग 35-35 साल खोते हैं तो इसके लिए किसी को - पुलिस को, सियासत को, इस सिस्टम को, इस निज़ाम को, किसी तो कसूरवार ठहराया जाना चाहिए...किसी को तो इंसाफ के कठघरे में खड़ा किया जाना चाहिए? किसी को तो सज़ा मिलनी चाहिए? या फिर सिर्फ़ बेकसूर सीधे सादे लोग ही सज़ा पाते रहें?

सोचें, चर्चा करें, कोई कदम उठाएं। इसलिए भी कि सत्ता अब यह खेल खूब खेल रही है।

यह राज्य के हाथों अन्याय के अनगिनत मामलों में एक है। कितने ही ऐसे मामले हैं जिसमें आतंकवाद के आरोप में 10-12, 15-20 साल जेल में बिताकर निर्दोष छूटते हैं। लाजपत नगर मामले या जयपुर मामले में ठोस सबूत के आधार पर पकड़े गए लड़के सालों जेल की जिल्लत के बाद निर्दोष पाए गए। बटाला हाउस के फर्जी एंकाउंटर में मारे गए या पकड़े गए आजमगढ़ के लड़कों का पता नहीं क्या होगा, कब निर्दोष पाए जाएंगे.....। ऐसे मामलों में न तो कोई क्षतिपूर्ति मिलती है न कोई दोषी पाया जाता है। यह सभी पूंजीवादी जनतंत्रों में ऐसा ही होता है। अमेरिका में मेकार्थिज्म के तहत कस्युुनिस्ट एजंट होने के आरेप में 1950 के दशक में किकतने मार डाले गए, कितने जेल की यातना सहे और कितने रोजगार से निकाल दिए गए, किसी अधिकारी या जज को कुछ नहीं हुआ। 1974 में इंगलैंड में एक बम धमाके के मामले में गिल्डफोर्ड फोर नामक मामले में प्रताड़ना से सबसे इकबालिया बयान लेकर आजीवन कारावास दे दिया गया जिस पर 'डेथ ऑफ फादर' फिल्म बनी, तमाम हो हल्लाके बाद मृतक फादर समेत सभी 1993 (या 1999) में निर्दोष पाए गए, किसी पुलिस वाले का भी कोई दोष नहीं पाया गया। पूंजीवादी राज्य में इसका निदान असंभव लगता है, क्रांति का अभी कोई ठिकाना नहीं है।

12.03.2020

Sunday, March 5, 2023

बेतरतीब 138 (आग जिलाना)

 हमारे बचपन में गांवों में बाजार की पैठ बहुत कम थी। घरों में माचिस रखने का चलन नहीं था, चूल्हे में जल चुके कंडे के नीचे कंडा रख कर आग जिआई (जिलाई) जाती थी। किसी दिन, किसी कारण आग जिंदा न रह पाई तो हम बच्चे लोहे के झन्ने में पड़ोसी के घर आग मांगने जाते थे।

Saturday, March 4, 2023

लंपट सर्वहारा धनपशुओं की दलाली करता है

लंपट सर्वहारा धनपशुओं की दलाली करता है
हक की लड़ाई को हक छिनने की वजह बताता है।

बजरंगी और तालिबानी जेहादियों में हैं कई समानताएं

 बजरंगी और तालिबानी जेहादियों में हैं कई समानताएं

बजरंगी और तालिबानी जेहादियों में हैं कई समानताएं
सबसे बड़ी समानता है दोनों में साम्यवाद के दौरे की
जब भी होती है रोजी-रोटी और शोषण की बात
साम्यवाद का दौरा पड़ता है कभी बारी बारी तो कभी एकसाथ

जिस देश में इंसाफ बुलडोजर करता हो

 जिस देश में इंसाफ बुलडोजर करता हो

जिस देश में इंसाफ बुलडोजर करता हो
जिस देश का हाकिम एंकाउंटर से राज चलाता हो
जिस देश में अपराध का अपराध जवाब होता हो
उस देश में बर्बरता का जंगल राज ही चलता है।