किसी मीटिंग के लिए पुलिस से अनुमति के लिए चप्पल घिसने पड़ते हैं और प्रदर्शनकारियों को बेरहमी से निपटने वाली , न्यूमतम मानवीय गरिमा से जीने के लिए नोएडा-गुड़गांव के मजदूर आंदोलन पर कहर बरपाने वाली पुलिस तिलचट्टा नेता केअमेरिका से आगमन पर हवाई अड्डे पर प्रदर्शन की अनुमति के साथ स्वागत करती है। गौरतलब है कि अभी भी बहुत से मजदूर तथा आंदोलन के समर्थक रासुका जैसी खतरनाक धाराओं में जेल में हैं। अमेरिका से आए तिलचट्टा नेता के हाथ में आरएसएस के प्रभात प्रकाशन से छपी अंबेडकर की आत्मकथा थी। गौरतलब है कि अंबेडकर ने कोई आत्मकथा लिखा ही नहीं है। परीक्षाओं की गड़बड़ियों के विरुद्ध कई राज्यों में छात्र सड़कों पर हैं और पुलिसिया कहर झेल रहे हैं। किसी तिलचट्टा नेता ने न तो आंदोलित छात्रों से कोई सहानुभूति जताई न ही मजदूरों से, न ही अपनी सैद्धांतिकी का कोई संकेत दिया। बाजपा-आरएसएस की बजाय राहुल गांधी और कांग्रेस की आलोचना किये। अन्ना की तरह भ्रष्टाचार खतम करने के लिए कटिबद्ध तिलचट्टों के प्रदर्शन के बारे में कांग्रेस के विरुद्ध आरएसएस प्रायोजित अन्ना-केजरी आंदोलन की पुनरावृत्त्ति का संदेह लाजमी है। यह वाकई यदि परिवर्तनकारी युवा आंदोलन बनता है, तो स्वागत करूंगा।
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कांग्रेस के विरुद्ध आरएसएस प्रायोजित अन्ना-केजरी आंदोलन की पुनरावृत्त्ति का संदेह सत्य प्रतीत हो रहा है
ReplyDeleteजी
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