हत्यारों के ग्लोबल सरगना के स्वागत के
विरोध प्रदर्शन के कार्यक्रम में मैं भी शामिल थाऔर सुना था उसकी प्रशंसा में आपकी यह कविता
और खुश हो रहा था कि
हत्यारा नहीं समझ पाया था प्रशंसा में छिपा व्यंग्य
और बच गया था
आपका नाम उसकी हिटलिस्ट में आने से
और सुन पा रहा हूं आज भी
प्रशंसा में लिप्त व्यंग्य की
आप की कविता
और करता हूं व्यक्त आभार
हत्यारों के ग्लोबल सरगना की नासमझी का
(ईमि: 04. 09.2026)

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