मैं तो हमेशा भविष्य की पीढ़ियों के प्रति यह सोचकर आशावान रहता था कि इतिहास की गाड़ी में रिवर्स गीयर नहीं होता इसलिए इतिहास के यूटर्न्स को अस्थाई मानता था, इताहास के यू टर्न से उपजी हताशा पर रोहित बेमुला से निकले जय भीम लाल सलाम के नारे ने पानी फेरना शुरू किया और जेएनयू आंदोलन ने उसे पानी में डुबो दिया था। अब जंतरमंतर आंदोलन ने आशा की नई किरणें दिखाई हैं। इंकिलाब जिंदाबाद।
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