जैसा उन्होने बताया था, पुनीत डंडन से आभा दयाल की मुलाकात लखनऊ में हुई थी। पुनीत से मेरी पहली मुलाकात लखनऊ में, जेएनयू से पढ़े और श्रीपत मिश्र के मुख्यमंत्रित्व काल में लखनऊ विवि में लेक्चरर बने आशुतोष मिश्र के साथ हुई थी। 1985-86 में, मैं कुछ दिनों साकेत के पास, पुष्पविहार में सरकारी कॉलोनी में एक फ्लैट सबलेटिंग पर लिया था। आभा को साथ अभय की शादी हो चुकी थी। पुनीत लखनऊ से किसी काम से दिल्ली आए थे और मेरे पास रहने आए, आभा उन दिनों नीपा में नौकरी करती थीं। पुनीत से मिलने वे पुष्पविहार मेरे फलैट पर मिलने आईं। मुझे यह सामान्य मित्रवत मुलाकात लगी थी।
बाद में पता चला कि पुनीत दिल्ली शिफ्ट हो गए और आभा के साथ ही रहने लगे।
आखिरी दिनों में अभय पांडव नगर में नहीं नोएडा में रहते थे और उसके पहले कटवरिया सराय में।
मैं जब हिंदू कॉलेज में हॉस्टल वार्डन था तब अभय कटवरिया के अपने मकान मालिक के साथ एकाध बार मिलने आए थे, बाद में फोन पर बात होती रहती थी, अभय ने कई बार नोएडा बुलाया लेकिन अब-तब करते चलता रहा और एक दिन अभय के असमय निधन की खबर मिली।
अभय की समृतियों को सलाम।

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