Santosh Tiwari गोडसे हिंदू महासभा के साथ आरयसयस का भी सदस्य था। 1932 में वह सांगली में संघ का बौद्धिक प्रमुख था। वह गोलवल्कर के संपर्क में था, कहा जाता है गोलवल्कर के साथ मिलकर उसने सावरकर की पुस्तक "राष्ट्र मीमांसा" का अनुवाद किया लेकिन उसकी क्रेडिट अकेले गोलवल्कर ने ले ली, तभी से दोनों में थोड़ी खट-पट हो गयी। आरयसयस शुरू से ही राष्ट्रीय आंदोलन का विरोधी रहा है। संघ और हिंदू महासभा में रहते हुए उसने 1942 में "हिंदू राष्ट्र दल" नामक अलग संगठन भी बनाया था। 1946 में बंटवारे के सवाल पर उसने हिंजू महासभा और आरयसयस छोड़ दिया था।
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