Monday, July 31, 2017

फुटनोट 107 (भक्तिभाव)

ऐसे चिरकुट, चीकटों की इस मुल्क में बहुतायत हैं, कुछ भी लिखो, सवाल करते हैं यह क्यों या यह क्यों नहीं लिखते, दिमाग से पैदल ये चीकट खुद कुछ नहीं लिखते। अरे भाई जो लिखा है उसकी समीक्षा करो, जो नहीं लिखा है उस पर खुद लिखो, लेकिन भक्तिभाव दिमाग को कुंद कर देता है और वह पंजीरी खाकर रटा रटाया भजन गाता रहता है, एक अभागे, दयनीय जीव की तरह।

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