Friday, July 28, 2017

फुटनोट 106 (गोभक्ति)

Sudhanshu Kumar आप जैसे युद्धोंमादी जाकर लड़ें चीन की सीमा पर, मैं तो, युद्ध विरोधी हूं। "Vaisr bhi main pashukul ka member rahna chahta hun", आपका पशुत्व आपको मुबारक। मेरी मां तो मर गयी, तो मां बेचने का सवाल ही नहीं पैदा होता। आप की मां का नहीं जानता, लेकिन हर महिला की उतनी ही इज्जत करता हूं, जितनी अपनी मां की। किसी ने नहीं कहा कि आप अपनी मांं बेचते हैं, तो सफाई का मतलब नहीं समझ आया, लेकिन मां बेचने की बात करना आपके विकलांग दिमाग की विकृति का द्योतक है। यह भी हो सकता है आपकी जहालत में आपकी मां का कोई हाथ न हो। हां कोई गाय-भैंस-सूअर मेरी मां नहीं है, वे उपयोगी पशु हैं। हो सकता है आप शाखा न गये हों लेकिन दो तरह के बजरंगी होते हैं -- सकच्छ और निष्कच्छ। निष्कच्छ भी उतने ही बड़े मानवता के दुश्मन हैं ।

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