Thursday, June 29, 2017

फुटनोट 100 (सेना)

इतिहास के हर युग में सेना भाड़े के हत्यारों का अनुशासित समूह रही है, जो बिना दिमाग का इस्तेमाल किए हुक्म तामील करती है और ऐसे लोगों का कत्ल करती है जिनसे उनकी कोई दुश्मनी नहीं होती. उनका नियोक्ता तय करता है कि उनका दुश्मन कौन है? शस्त्र-प्रशिक्षण के साथ सैनिक को बिना किसी सवाल के हुक्म मानने के अनुशासन का प्रशिक्षण भी दिया जाता है. दुश्मन का मानवाधिकार नहीं होता इसलिए इतिहास में सैनिकों द्वारा लूट और बलात्कार की बाते आम हैं. चूंकि सभ्यता के हर युग में आजीविका के लिए, सोचने का अधिकार गिरवी रख कर वर्दी पहनने वाले गरीबों की उपलब्धता रही है, इसीलिए हर युग में कुछ बुद्धिमान शातिर बहुसंख्यक आबादी पर राज करते रहे हैं. 15 अगस्त 1947 तक जो सेना अंग्रेजों के हुक्म पर हिंदुस्तानियों का कत्ल करती थी वह उसके बाद देसी हुक्मरानों के हुक्म पर. बंबइया फिल्म के डॉन की भाषा में सेना के मुखिया का आवाम पर सेना के खौफ का बयान और सभ्यता के सारे मानकों को धता बताते हुए एक नागरिक को जीप की बोनट से बांधकर घंटों सड़कों पर घुमाने की अमानवीयता को अंजाम अंजाम देने वाले अधिकारी का सम्मान, संवैधानिक जनतंत्र के लिए अपशकुन है. क्या भारत पाकिस्तान के रास्ते पर है?

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