Monday, May 1, 2017

फुटनोट 97 (नेहरू-निराला)

इलाहाबाद में नेहरू और निराला को लेकर एक किंवदंति प्रचलित थी. नेहरू इलाहाबाद में किसी सभा को संबोधित कर रहे थे. निराला जी मानसिक विक्षिप्त रहने लगे थे. निराला को पता चला तो गंदी लुंगी-बंडी में मिलने चल दिए. पुलिस वाले रोकने लगे कि नेहरूजी की नजर पड़ी और वे सारे प्रोटोकोल की ऐसी-तैसी करते पुलिस वालों को डांटते हुए निराला के पास पहुंचे और उन्हें मंच पर ले आए. इसमें कितना सच है पता नहीं लेकिन किसी शोध के चक्कर में तीनमूर्ति लाइब्रेरी में नेहरू के निजी पेपर देख रहा था कि एक हस्तलिखित चिट्ठी मिली. नेहरू ने प्रयाग हिंदी सम्मेलन के अध्यक्ष को पत्र लिखा कि इलाहाबाद में निराला नाम के एक महान कवि रहते हैं जिनकी आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं है इसलिए अगर इतने (शायद 100) रूपये के मानदेय का प्रावधान हो तो उन्हें यह दिया जाए और यदि ैसे प्रावधान बनाने में केंद्र की सहायता की जरूरत होगी तो पूरी की जाएगी. उन्होंने यह भी लिखा कि यह राशि उन्हें न देकर महादेवी वर्मा को दिया जाए वे उनका ख्याल रखती हैं. यह पत्र तीनमूर्ति में है.

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