Thursday, March 2, 2017

फुटनोट 89 (नैतिकता)

सही है, हो सकता है इनकी प्रोफाइल हैक हो गयी हो. (4 साल पहले मेरी भी हो गयी थी) लेकिन हैकर भी तो कोई इंसान ही होगा, किसी भी इंसान की ऐसी अमानवीय और वीभत्स सोच कैसे हो सकती है? हम क्या शिक्षा दे रहे हैं बच्चों को? आज मैं सुबह से यही सोच रहा हूं कि लोग सच जानते हुए भी क्यों झूठ बोलते हैं? जानते हुए कि कोई काम गलत है, फिर भी क्यों करते हैं? लोग किसी अज्ञात, अमूर्त, कल्पित खतरों से क्यों आक्रांत रहते हैं? 'तटस्थ' बहुमत अन्याय पर क्यों मौन रहता है? मैं नहीं मानता कि मनुष्य स्वभावतः अनैतिक और अपराधी प्रवृत्ति का होता है, ये प्रवृत्तियां सामाजीकरण और शिक्षा के परिणाम हैं.

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