Friday, February 3, 2017

फुटनोट 86 (आज़मगढ़)

इस लंपट आदित्यनाथ ने आज़मगढ़ में कई बार दंगा करवाने की नाकाम कोशिस की तथा माहौल को विषाक्त करने में कुछ हद तक सफल भी रहा. आज़मगढ़ मुल्क की सामासिक संस्कृति का अनूठा नमूना है जिसे तोड़ने की ये लंपट सन् 2000 से कई कोशिस कर चुके, लेकिन मामुली तोड़-फोड़ के अलावा ये सांप्रदायिक अपराधी दंगा कराने में असफल रहे. रंगनाथ मिश्र नामक भदोही का भाजपाई विधायक सिबली नेसनल क़ॉलेज में बंदेमातरम् के नाम पर बजरंगियों के साथ तोड़-फोड़ किया लेकिन लोग उसकी चाल समझ गये तथा शहर में शांति बनी रही.2008 में रमजान के दौरान यह लंपट सांसद बिना अनुमति वाले रूट से मुस्लिम बाहुल्य वाले इलाके से उंमादी नारों के साथ जुलूस लेकर निकला. लोगों ने सद्बुद्धि का परिचय दिया तथा इसके जुलूस पर छोटी-मोटी पत्थरबाजी के सिवा कोई प्रतिक्रिया नहीं होने दी. सभा में इसने आज़मगढ़ को आतंकगढ़ कह दिया तथा दलाल मीडिया तथा पुलिसिया गिरोह ले उड़े. आज़मगढ़ के पढ़े-लिखे युवकों की धर-पकड़ शुरू हो गयी बटाला हाउस का फर्जी मुठभेड़ उसकी तार्किक परिणति थी. 17 साल का आतिफ जो दिल्ली 1 महीने पहले आया था उसे मास्टरमाइंड कह मार दिया. उसके सिर में लगीं 6 गोलियों में 3 ऊर्ध्वाधर लगी थीं. सलाम आज़मगढ़. शहर की आबादी में जन्मना हिंदू-मुस्लिम लगभग बराबर हैं लेकिन यहां न 1947 में न उसके बाद, न 1992 में न उसके बाद कोई भी दंगा नहीं हुआ न ही इस उन्मादी के आतंकगढ़ की घोषणा के बाद.
(4 फरवरी, 2016)

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