Friday, January 20, 2017

फुटनोट 84

Ramdhyan Rd बिल्कुल सुना है बिहार का नाम, भोजपुरी क्षेत्र का होने को नाते जानता हूं कि पूर्वी उत्तरप्रदेश की और बिहारी संस्कृति लगभग एक ही है. आप शायद व्यंग्य समझ नहीं पाए या शायद मेरे कहने में कमी रह गई है. 'भाजपा लाओ, आरक्षण हटाओ' को इनवर्टेड कॉमा लगाकर पढ़ें. ब्राह्मणवाद आरयसयस और इसके संसदीय विंग भाजपा का स्थाई चरित्र है. दर-असल औपनिवेशिक नीतियों के अनचाहे उपपरिणाम के रूप में शिक्षा की सार्वजनिक सुलभता के चलते जब ब्राह्मणवाद के अस्तित्व पर खतरा मंड़राने लगा तब वह हिंदुत्व बन गया और फिर भारतमाता की जय वाला राष्ट्रवाद. अरे भाई हिंदू एक कृतिम मिथ्या अवधारणा है क्योंकि ब्रह्मा की कृपा से हिंदू कोई नहीं पैदा होता, कोई ब्राह्मण पैदा होता है कोई दलित. जो लोग दिल्ली विश्वविद्यालय में 1990 के मंडलविरोधी उंमाद के साक्षी हैं उन्हें याद होगा कि दिल्ली विश्ववियालय के शिक्षकों की आमसभा में 'मनुवाद मुर्दावाद' के हमारे नारे के जबाब में संघी शिक्षक 'कसम राम की खाते हैं, मंदिर वहीं बनाएंगे' के नारे लगा रहे थे. तब सभी प्रकार के आरक्षणविरोधियों का विवि में बहुमत था और शिक्षकसंघ के वामपंथी अध्यक्ष को इस्तीफा देना पड़ा था, संख्यातंत्र के शासन की मजबूरी के तहत भक्त अंबेडकर मूर्तियां भले लगाएं.

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