Monday, September 5, 2016

फुटनोट 75 (चरणस्पर्श)

Patel Ramavtar Kundal सही कह रहे हैं छात्र शिक्षक का चरण-स्पर्श ब्राह्मणों के चरण स्पर्श से भिन्न है, लेकिन अभिवादन का यह तरीका वहीं से आयातित है. पहले गुरू भी तो सभी ब्राह्मण ही होते थे. चरणस्पर्शीय सम्मान छात्र का मौलिक विचार नहीं है बल्कि खास तरह के सामाजिककरण का परिणाम है. जैसे ही बच्चा चलने फिरने लगता है, मां-बाप उसे बड़ों का चरणस्पर्श सिखाते हैं. दर-असल हम कई सामाजिक मान्यताओं को बिना उसका निहितार्थ समझे, बिना सवाल किए अंतिम सत्य के रूप में अपना लेते हैं. चरणस्पर्श है एक 'छोटे' का बड़े के पांव में झुकना. मुझे समानता भाव में गुरुत्व भाव में ज्यादा आनंद आता है. छात्रों की जगह दिल में है पैर में नहीं. जब विद्यार्थियों को मित्र कहता हूं तो व्यवहार में भी होना चाहिए. भाई पैर में गिर कर ही क्यों सम्मान हो सकता है, गले लगकर क्यों नहीं? मेरे स्टूडेंट न तो चरणस्पर्श करते हैं न ही क्लास में खड़े होते हैं, लेकिन शायद सम्मान और प्यार कम नहीं करते. यहां 2 जगहों के 2 स्टूडेंट्स के कमेंट हैं, मुझे तो सम्मान ही लग रहा है. मुझसे कोई कहता है कि मेरे स्टूडेंड्स बहुत इज्जत करते हैं तो मैं कहता हूं कौन सा एहसान करते हैं, मैं भी तो उनकी इज्जत करता हूं. बरब्बर. हा हा. इज्जत न तो दहेज में मिलती है न बाजार में, कमाई जाती है और पारस्परिक होती है.

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