Saturday, August 27, 2016

फुटनोट 71

सभी मित्रों का कोटिशःआभार. इस मंच को सार्थक विमर्श का मंच बनाने में यथासंभव योगदान दूंगा. मैं साधारण व्यक्ति हूं. मेरी पोस्ट पर विषय पर बात करें तो आभारी रहूंगा. विमर्श विषयांतर से विकृत हो जाता है, ऐरत पर कविता पर स्टालिन के अपराधों का हिसाब न मांगें. उस पर अलग पोस्ट पर विमर्श करें. जैसा मैंने कहा हर किसी की तरह मैं भी साधारण इंसान हूं और निराधार अपमान अपमानजनक निजी आक्षेपों पर कभी आपा खो देता हूं और भूल जाता हूं कि 41 साल पहले 20 का था और उन्ही की भाषा में जवाब देकर पछताता हूं. मेरी किसी से खेत मेड़ की लड़ाई नहीं है, मेरी अंत्येष्टि की चिंता करने से लोगों को परहेज करना चाहिए क्योंकि मौत एकमात्र अंतिम सत्य और अनिश्चित कोई नहीं जानता किसकी मौत कब आ जाये. इसलिए मौत से बेखौफ जब तक जिंदगी है सार्थकता से उसका श्रृजनशील लुत्फ उठाएं.

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