Wednesday, August 24, 2016

फुटनोट 70 (मिश्र)

Pradeep Tiwari & Bondal Baba Kapti जी जब भी जातिवादी/ब्राह्मणवाजी/धर्मांधतावादी दुराग्रहों का विरोध करता हूं तुरंत लोग नाम से मिश्र हटाने की नशीहत देते हैं. मिश्राओं को विवेकसम्मत, चिंतनशीलता की मनाही है क्या? हां मेरे कहने की जरूरत नहीं होगी मेरी बेटियां मेरे मरने के बाद (वैसे मैं तो 135 साल जिऊंगा, हा हा) खुद-ब-खुद मेरी निर्जीव शरीर अगर चिकित्सा विज्ञान के काम आने लायक रहेगी तो किसी मेडिकल कॉलेज को दे देंगी नहीं तो साथी लालसलाम के विजली के शवदाह के हवाले कर देंगे. वैसे यह तो आपके सवाल का जवाब दे दिया नहीं तो मैं मौत के बारे में सोचता नहीं, सिर्फ जिंदगी के बारे में सोचता हूं, इसे अधिकतम मानवोपयोगी बनाने के बारे में. कपटी जी आपकी बात बिल्कुल सही है कि मुझपर जेयनयू का प्रभाव है बल्कि प्रभाव छोड़ने की परंपरा के निर्णाण की प्रक्रिया का हिस्सा रहा हूं. जैसे ही तर्क की बातें करता हूं लोग बिन बताए जेयनयू मीनिया से परेशान हो जाते हैं.

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