Saturday, August 20, 2016

फुटनोट 69 (जनेऊ)

Vijay Verma इसीलिए मिश्र लिखता हूं कि नवबाह्मणवादियों को पंडित की गाली देकर मन की भंड़ास निकालने का अवसर मिल सकें. काम या विचार की बजाय जन्म के आधार पर व्यक्तित्व का मूल्यांकन ब्राह्मणवाद का मूलमंत्र है. ऐसा करने वाले ब्राह्मणवाद के पोषक हैं. इसलिए ऐसा करने वाले जन्मना अब्राह्ण नवबाह्मणवादी हैं. कैसा ज्ञान है कि पीयचडी करके भी लोग जन्म की जीववैज्कानिकञ दुर्घटना से मिली अस्मिता से ऊपर नहीं उठ पाते? किसी ने सही कहा है कि दुनिया के पढ़े-लिखे जाहिलों का प्रतिशत अपढ़ों से अधिक है.

No comments:

Post a Comment